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'सबूत सौंपें, पाक से कार्रवाई की माँग करें' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मुंबई बम धमाकों में पाकिस्तानी गुप्तचर एजेंसी आईएसआई और चरमपंथी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का हाथ होने के मुंबई पुलिस के दावे के बाद प्रस्तावित भारत-पाक साझा आतंकवाद निरोधक तंत्र पर फिर चर्चा गरम हो गई है. सामरिक मामलों के जानकार सी राजामोहन का कहना है कि भारत को ताज़ा सबूत पाकिस्तान को सौंपकर कार्रवाई करने के लिए कहना चाहिए. राजामोहन कहते हैं, "पाकिस्तान पहले से कहता रहा है कि आप सबूत दीजिए हम कार्रवाई करने के लिए तैयार हैं. भारत को इस मामले में अगले महीने दोनों देशों के बीच गठित होने वाले साझा तंत्र पर बातचीत के समय सबूत सौंपने चाहिए और कार्रवाई की माँग करनी चाहिए." वे कहते हैं कि दोनों देश अब तक राजनीतिक रूप से एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते रहें हैं लेकिन साझा तंत्र बनने से दोनों को एक मंच मिलेगा. उनके अनुसार इससे पहली बार यह मौक़ा मिलेगा जब दोनों देशों की गुप्तचर सेवा के लोग आमने-सामने बात कर सकेंगे. इसके माध्यम से दोनों देशों को आपसी समस्याओं को उठाने का मौक़ा मिलेगा. पाकिस्तान को आज़माएँ राजामोहन का कहना है कि ज़रूरी नहीं कि यह तंत्र पूरी तरह सफल होगा पर इसे एक बार आज़माना चाहिए. इससे पाकिस्तान को परखने का भी मौक़ा मिल जाएगा और यह भी पता चल जाएगा कि उसके पास कार्रवाई करने की राजनितिक इच्छाशक्ति है या नहीं. उनके अनुसार पहले जैसे हर छोटी-छोटी बात पर बातचीत को बीच में ही नहीं रोक लेना चाहिए. अनेक हलकों में आतंकवाद निरोधक साझा तंत्र बनने के प्रस्ताव का विरोध करने की बात पर राजमोहन कहते हैं कि इसके सिवा किसी के पास कोई दूसरा चारा नहीं है. राजामोहन का कहना है, "बातचीत के अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं है. वर्ष 2002 में हम युद्ध के क़रीब पहुँच गए थे लेकिन ऐसे रवैए से कोई बात नहीं बनने वाली है." उन्होंने कहा कि पिछले दो-तीन सालों में बातचीत से भारत-पाकिस्तान संबंधों मे कुछ तो सुधार हुआ ही है साथ ही हिंसा में भी थोड़ी कमी आई है. |
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