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मुशर्रफ़ की किताब का विमोचन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ की किताब 'इन द लाइन ऑफ़ फ़ायर' का अमरीका में विमोचन हो गया है. हालांकि विमोचन से पहले ही यह पाकिस्तान और अमरीका के बाज़ार में आ गई है और इस किताब को लेकर बहस भी शुरू हो गई है. राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने इस किताब में करगिल युद्ध, पाकिस्तान की परमाणु शक्ति और 11 सितंबर के हमलों के बाद पाकिस्तान की कूटनीति के बारे में 'कई जानकारियों' की चर्चा की है. यह किताब छह हिस्सों में है और इसमें 32 अध्याय हैं. इस किताब में राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने दिल्ली से पाकिस्तान आने, सेना में शामिल होने से लेकर नवाज़ शरीफ़ के ख़िलाफ़ विद्रोह का भी ज़िक्र किया है. लेकिन उन्होंने करगिल युद्ध, पाकिस्तान के परमाणु वैज्ञानिक अब्दुल क़दीर ख़ान की ओर से परमाणु जानकारी लीक किए जाने का मामला और 11 सितंबर के बाद की स्थितियों में पाकिस्तानी नीतियों के बारे में विस्तार से लिखा है. करगिल युद्ध करगिल युद्ध के बारे में राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने लिखा है कि भारत पाकिस्तान पर हमला करने की तैयारी कर रहा था. इसलिए पाकिस्तान ने ऐसा किया. उन्होंने लिखा है कि पहले कश्मीर में आज़ादी की लड़ाई लड़ रहे मुजाहिदीन इसमें लड़ रहे थे लेकिन बाद में पाकिस्तानी सेना भी इस युद्ध में शामिल हुई. पाकिस्तान पहले करगिल युद्ध में अपनी सेना की भूमिका से इनकार करता रहा है. करगिल युद्ध के समय भारतीय सेना के प्रमुख रहे जनरल वीपी मलिक ने बीबीसी से बातचीत में कहा है कि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ की इस बात में कोई सच्चाई नहीं है. उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति मुशर्रफ़ की बात में कोई सच्चाई नहीं है. या फिर उनका इंटेलिजेंस इतना कमज़ोर है कि उन तक सही बात नहीं पहुँचाई गई." पाकिस्तान में भारत के पूर्व उच्चायुक्त और करगिल जाँच समिति के सदस्य सतीश चंद्रा ने भी बीबीसी से बातचीत में इसे सच्चाई से परे बताया है. उन्होंने कहा कि अगर भारतीय सेना उस समय आक्रमक स्थिति में रहती तो करगिल में घुसपैठ कैसे होती. वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ वरदराजन का कहना है कि अगर भारत हमला करने की तैयारी कर रहा था, तो राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने 1998-99 के बाद से एक बार भी ये बातें क्यों नहीं कही. अपनी किताब में राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने लिखा है कि करगिल युद्ध पाकिस्तानी सेना के लिए 'बहुत अहम' था. उन्होंने लिखा है कि पाकिस्तानी सेना के पाँच बटालियन भारतीय सेना के चार डिविज़न के आगे डटे रहे. क़दीर ख़ान पाकिस्तानी परमाणु कार्यक्रम के जनक माने जाने वाले अब्दुल क़दीर ख़ान के बारे में भी राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने विस्तार से लिखा है. मुशर्रफ़ ने लिखा है कि कैसे अब्दुल क़दीर ख़ान उनसे मिलने आए और फिर उन्होंने उन्हें उनके पद से हटाया.
उन्होंने लिखा है कि अब्दुल क़दीर ख़ान 1987 से इस तरह के काम में शामिल थे. उनके साथ कहूटा लेबॉरेटरी के पाँच-छह वैज्ञानिक भी शामिल थे. राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने लिखा है कि क़दीर ख़ान ने अपनी आज़ादी का फ़ायदा उठाया और ईरान से उनका संपर्क था. उन्होंने लिखा है कि दुबई के ज़रिए ये काम होता था, जिनमें यूरोपीय और भारतीय नागरिक भी शामिल थे. मुशर्रफ़ ने स्वीकार किया है कि उन्हें तो क़दीर ख़ान के बारे में थोड़ी-बहुत ही जानकारी थी. लेकिन सबसे ज़्यादा जानकारी उन्हें अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए से मिली. राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने 11 सितंबर की घटना के बाद की गतिविधियों का भी किताब में ज़िक्र किया है. उन्होंने लिखा है कि अमरीका के विदेश उप मंत्री रिचर्ड आर्मिटेज़ ने पाकिस्तान पर बमबारी की धमकी दी थी. |
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