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मुशर्रफ़ के बयान पर बुश हैरान | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा है कि वह पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ का यह बयान अख़बारों में देखकर हैरान रह गए कि 11 सितंबर 2001 के हमलों के बाद अमरीका ने पाकिस्तान को साथ नहीं आने पर बमबारी की धमकी दी थी. पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने अपने इस बयान से उठे विवाद के बीच शुक्रवार को राष्ट्रपति बुश से वाशिंगटन में मुलाक़ात की. यह मुलाक़ात वाशिंगटन में व्हाइट हाउस में हुई जो लगभग एक घंटा चली जिसके बाद दोनों नेताओं ने संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया. संवाददाता सम्मेलन में मुशर्रफ़ के कथित अमरीकी धमकी बारे में बयान पर सवाल उठे. उनका कहना था कि इस बयान के लिए किताब पढ़िएगा. अलबत्ता, राष्ट्रपति बुश ने कहा कि जब उन्होंने गुरूवार को सुबह उठकर अख़बारों में इस तरह के बयान देखे तो हैरान रह गए. वॉशिंगटन में बीबीसी संवाददाता शाहज़ेब जीलानी का कहना है कि इस बात से इन अटकलों को बल मिलता है कि यह बयानबाज़ी किताब के प्रचार के लिए की गई थी. 'फ़लस्तीन का मुद्दा' संवाददाता सम्मेलन में राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने कहा कि फ़लस्तीन का मुद्दा 'आतंकवाद और उग्रवाद' के केंद्र में है. लेकिन उन्होंने ये भी कहा कि उन्हें विश्वास है कि राष्ट्रपति बुश इसे सुलझाने के इच्छुक हैं. ओसामा के बारे में पूछे गए सवालों का दोनों नेताओं ने एहतियात के साथ जवाब दिया. उनका कहना था कि इस बारे में वे मिल कर काम करेंगे.
बुश ने 11 सितंबर 2001 के हमलों के बाद एक दुश्मन का ख़ात्मा करने के अभियान में अमरीका का सहयोगी बनने के लिए पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ की सराहना की. कश्मीर पर बुश की राय कश्मीर विवाद पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में राष्ट्रपति बुश ने कहा कि यह दोनों देशों पर निर्भर है कि वे इस विवाद को किस तरह हल करना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि दोनों देश चाहेंगे तो अमरीका कोई भूमिका निभा सकता है और वे चाहेंगे तो अमरीका बिल्कुल अलग रह सकता है. राष्ट्रपति बुश ने कहा कि भारतीय प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह और राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के बीच हाल ही में न्यूयॉर्क में हुई मुलाक़ात से झलकता है कि दोनों नेता शांति के लिए संकल्पबद्ध हैं. वज़ीरिस्तान में समझौता पाकिस्तान-अफ़ग़ानिस्तान सीमा के इलाक़े में क़बायली नेताओं और सरकार के साथ हाल ही में हुए एक समझौते के बारे में परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा कि यह समझौता तालेबान का प्रभाव रोकने के लिए किया गया है.
राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा, "यह समझौता तालेबान के साथ क़तई तौर पर नहीं है बल्कि यह तो तालेबान के ख़िलाफ़ है. यह क़बायली नेताओं के साथ है." इस पर राष्ट्रपति बुश ने परवेज़ मुशर्रफ़ की तरफ़ इशारा करते हुए कहा, "मैं इन पर विश्वास करता हूँ." बमबारी की धमकी ग़ौरतलब है कि राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने एक दिन पहले ही कहा था कि ग्यारह सितंबर 2001 को हुए हमलों के बाद अमरीका ने पाकिस्तान पर भीषण बमबारी करने की धमकी दी थी. उनका कहना था कि उस समय अमरीका के विदेश उपमंत्री रिचर्ड आर्मिटेज ने पाकिस्तान की गुप्तचर सेवा के निदेशक को दो विकल्प दिए थे. राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने ऐसा एक अमरीकी टीवी नेटवर्क सीबीएस को गुरूवार को दिए एक इंटरव्यू में कहा था. अमरीका ने 'आतंकवाद के ख़िलाफ़ युद्ध' में सहयोग देने के लिए गुरुवार को ही पाकिस्तान की प्रशंसा की थी.
समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार बुश-मुशर्रफ़ की इस मुलाक़ात से पहले व्हाइट हाउस ने कहा था कि जिस कथित धमकी का ज़िक्र राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने किया है वह अमरीकी विदेश नीति में नहीं झलकती है. व्हाइट हाउस के प्रवक्ता टोनी स्नो ने कहा, "बमबारी करने की धमकी देना अमरीकी नीति नहीं रही है. अमरीकी नीति राष्ट्रपति मुशर्रफ़ से यह कहने कि रही है कि हम चाहते हैं कि आप कोई फ़ैसला लें." प्रवक्ता ने कहा, "यह संदेश समझने में भ्रम होने का कोई मामला लगता है. मुझे पूरी जानकारी नहीं है." समाचार एजेंसी एपी के अनुसार रिचर्ड आर्मिटेज ने गुरूवार को सीएनएन से कहा कि उसने पाकिस्तान पर बमबारी की कभी धमकी नहीं दी थी और ऐसा कुछ नहीं कहा. | इससे जुड़ी ख़बरें 'अमरीका ने बमबारी की धमकी दी थी'21 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस संयुक्त राष्ट्र महासभा में मध्य-पूर्व की गूँज19 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना पाकिस्तान के साथ एक 'नई शुरूआत'18 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस महासचिव के चुनाव की सरगर्मी तेज़18 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना भारत में संयुक्त बयान पर प्रतिक्रियाएँ17 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस मनमोहन-मुशर्रफ़ संयुक्त बयान17 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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