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बुधवार, 20 सितंबर, 2006 को 11:53 GMT तक के समाचार
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संयुक्त राष्ट्र महासभा में मध्य-पूर्व की गूँज
जॉर्ज बुश
बुश ने दारफ़ुर संकट को सुलझाने की ज़रुरत बताते हुए कहा है कि संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता दाँव पर है
संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में मध्य-पूर्व का संकट और दारफ़ुर की अराजक स्थिति का मुद्दा छाया रहा.

अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने संयुक्त राष्ट्र की 61वीं महासभा में दिए अपने भाषण में मध्य-पूर्व, इराक़, ईरान और अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी नीतियों का बचाव किया है.

उनका कहना था कि क्षेत्र में लोकतंत्र अपनी जड़ें जमा रहा है जबकि चरमपंथी हाशिए पर आ गए हैं.

उन्होंने सूडान में दारफ़ुर संकट को सुलझाने का आह्वान करते हुए कहा कि इसकी वजह से संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता दाँव पर है.

उन्होंने अफ्रीका के इस संकटग्रस्त क्षेत्र में एंड्रू नात्सिओस को विशेष प्रतिनिधि के रुप में भेजने की भी घोषणा की.

अमरीकी राष्ट्रपति ने कहा कि दारफ़ुर में जारी जनसंहार को रोकने के लिए अफ्रीकी देशों की सेना को वहाँ मज़बूती से स्थापित किए जाने की ज़रुरत है.

शिराक

फ्रांस के राष्ट्रपति जैक्स शिराक ने मध्य-पूर्व में शांति स्थापित करने के लिए अविलंब एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने की सलाह दी.

उन्होंने लेबनान में लड़ाई से हुई तबाही का जिक्र करते हुए वहाँ से इसराइली सेना का अविलंब वापसी का समर्थन किया.

फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने लेबनान के पुनर्निमाण के लिए अंतरराष्ट्रीय बिरादरी से आगे आने का अह्वान किया.

जैक्स शिराक़ ने कहा कि मध्य-पूर्व संकट का एकमात्र हल यही है कि इसराइल और फ़लस्तीन दोनो अलग अलग राष्ट्र के रुप में सौहार्द के साथ रहें.

अन्नान का भाषण

इसस पहले शुरुआती भाषण में संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने कहा कि युद्ध रोकने में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका पर उन्हें गर्व है पर अभी भी बहुत सारे लोगों को ऐसी स्थितियों का सामना करना पड़ रहा है.

महासभा के उद्धाटन भाषण में अन्नान ने कहा कि इराक़ में जिस तरह की स्थितियाँ बन गई थीं उससे वो एक बड़े गृह युद्ध की कगार पर पहुँच चुका था.

उन्होंने आतंकवाद पर भी चिंता जताई और कहा कि हालांकि आतंकवादी घटनाओं से ज़्यादा लोग युद्ध में मारे गए हैं पर आतंकवाद का दुनियाभर में लोगों पर प्रतिकूल असर पड़ा है.

लोगों में भय और असुरक्षा की भावना बढ़ी है और समुदायों में असहिष्णुता बढ़ी है.

कार्यक्रम के अनुसार ईरान, फ़्रांस, दक्षिण अफ्रीका और पाकिस्तान सहित अन्य कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष महासभा को संबोधित करेंगे.

मुद्दे

माना जा रहा है कि इस बार मध्यपूर्व संकट के अलावा दारफ़ुर की स्थिति और ईरान के परमाणु कार्यक्रम जैसे विषय प्रमुखता से चर्चा का विषय बनेंगे.

ग़ौरतलब है कि इसी वर्ष दिसंबर में कोफ़ी अन्नान का संयुक्त राष्ट्र महासचिव के रूप में कार्यकाल पूरा हो रहा है.

उन्होंने कहा, "भूमंडलीकरण एक ऐसा रस्सा नहीं साबित हुआ जो सभी नावों को एकसाथ बाँध सके."

अन्नान ने माना कि उनके कार्यकाल के दौरान कई देश ग़रीबी की समस्या से ऊपर उठने में सफल रहे पर अभी भी कुछ देश इस समस्या से जूझ रहे हैं.

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