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संयुक्त राष्ट्र मेरा जुनून है-थरूर | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत की ओर से संयुक्त राष्ट्र में महासचिव पद के उम्मीदवार घोषित किए गए शशि थरूर का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र तो उनका जुनून है और वे चाहते हैं कि एक बार इस संस्था का नेतृत्व करें. उनका कहना है कि वह संयुक्त राष्ट्र महासचिव के पद को हासिल करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेंगे. उल्लेखनीय है कि वर्तमान महासचिव कोफ़ी अन्नान का कार्यकाल इस साल दिसंबर में ख़त्म हो रहा है और उनकी जगह नए महासचिव का चुनाव किया जाना है. इस बार किसी एशियाई व्यक्ति को इस पद के लिए चुना जाना है. एशिया से तीन और उम्मीदवारों की घोषणा हो चुकी है और पाकिस्तान भी जल्दी ही एक उम्मीदवार घोषित करने जा रहा है. अभी अमरीका का रुख़ साफ़ नहीं है और चर्चा चल रही है कि भारत की उम्मीदवारी के ख़िलाफ़ चीन वीटो का इस्तेमाल करेगा. लेकिन शशि थरूर इन सब बाधाओं से ज़रा भी विचलित नहीं दिखते. शशि थरूर इस पद पर काम करने के लिए वह ख़ासे तैयार नज़र आते हैं. उन्होंने कहा, “संयुक्त राष्ट्र तो मेरा जुनून है. मैने संयुक्त राष्ट्र में काम करते हुए अपना आधा जीवन बिता दिया है. और अब अपने करियर के आख़िर में मैं चाहता हूं कि महासचिव के पद पर काम करूँ. और मैं इसके लिए पूरी तरह तैयार हूँ.” भारतीय नागरिक शशि थरूर फिलहाल संयुक्त राष्ट्र में उपमहासचिव के रूप में कार्यरत हैं और वह संचार और सार्वजनिक सूचना विभाग देखते हैं. थरूर के अतिरिक्त तीन और नाम भी एशिया के अन्य देशों से सुझाए गए हैं. इनमें श्रीलंका से जयंत धनपाल, थाइलैंड से उप प्रधानमंत्री साथिरथाई और दक्षिण कोरिया के विदेशमंत्री बान किमून का नाम प्रस्तावित है. थरूर को कड़ी टक्कर देने वालों में श्रीलंका के जयंत धनपाल का नाम सबसे ऊपर है. लेकिन थरूर किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह दृढ़संकल्प दिखाई दिए. उन्होंने कहा, “उम्मीदवार क्या जितने भी आ जाएँ कोई फ़र्क नहीं पड़ता. जब एक बार हम इस रास्ते पर चल पड़े हैं तो सारी चुनौतियों का सामना करेंगे.” शशि थरूर 1978 से संयुक्त राष्ट्र से जुड़े हुए हैं. उनका कहना है कि वे महासचिव पद के हासिल करने के लिए जी जान एक कर देंगे. समर्थन की चुनौती थरूर को सुरक्षा परिषद के पाँचों स्थाई सदस्य देशों का समर्थन हासिल करना होगा. चीन के बारे में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि शायद वह थरूर के खिलाफ़ वीटो का इसतेमाल करेगा. लेकिन थरूर हिम्मत नहीं हार रहे हैं. उनका कहना था, “समर्थन से ज़्यादा स्थाई सदस्यों के वीटो का तो डर है लेकिन हम तो इस दौड़ में उतर ही गए हैं. अगर हमें इस बात का डर होता तो हम उतरते ही नहीं. सबसे बातचीत करके समर्थन जुटाया जाएगा.” अफ़्रीकी देशों के समूह का समर्थन तो थरूर को प्राप्त है लेकिन इस चुनाव में जीत के लिए सुरक्षा परिषद में समर्थन ज़रूरी है और अभी तक अमरीका का भी रूख़ स्पष्ट नहीं हुआ है.
गुरूवार को संयुक्त राष्ट्र में अमरीकी राजदूत ने थरूर के समर्थन देने के सवाल पर टिप्पणी करने से मना कर दिया. भारत ने शशि थरूर की दावेदारी के पक्ष में सदस्य देशों से समर्थन जुटाने का प्रयास शुरू कर दिया है. संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत निरूपम सेन का कहना है कि इस प्रक्रिया में अब तेज़ी आएगी. और विभिन्न देशों के समर्थन के लिए प्रयास और तेज़ किए जाएंगे. संयुक्त राष्ट्र में महासचिव पद के लिए शशि थरूर की उम्मीदवारी के एलान के बाद इस चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज़ हो गई हैं. भारत समेत एशिया से अब तक चार देशों के उम्मीदवार मैदान में हैं. आगे उम्मीदवारों की सूची में और नाम बढ़ने की संभावनाएँ भी जताई जा रही हैं. खासकर पाकिस्तान की ओर से. भारत की ओर से संयुक्त राष्ट्र महासचिव पद के लिए शशि थरूर की दावेदारी के एलान के बाद अब पाकिस्तान ने भी अपनी मुहिम तेज़ कर दी है. संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के राजदूत मुनीर अकरम का कहना है कि जल्द ही पाकिस्तानी उम्मीदवार की घोषणा कर दी जाएगी.
मुनीर अकरम ने कहा, “हम अपने उम्मीदवार के बारे में कुछ अरसे से सोच रहे थे. अब जबकि भारत ने अपने उम्मीदवार की घोषणा कर दी है तो हमें भी जल्द ही अपने उम्मीदवार का नाम तय करना होगा.” चूंकि संयुक्त राष्ट्र में सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्यता वाले देश या जो इसके इच्छुक होते हैं उन्हे अपना उम्मीदवार खड़ा करने का रिवाज नहीं है. भारत सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए पिछले कई वर्षों से प्रयासरत रहा है और इसीलिए महासचिव पद के लिए अपनी ओर से कोई नाम सुझाने से बचता रहा है. मुनीर अकरम ने इसी ओर इशारा करते हुए कहा कि भारत के इस तरह महासचिव के पद के लिए थरूर की उम्मीदवारी का एलान करने से यह इशारा भी मिलता है कि अब भारत संयुक्त राष्ट्र में सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्यता की दावेदारी छोड़ देगा. लेकिन थरूर इस तर्क को नकारते हैं. उनका कहना है कि ये दोनों मामले अलग-अलग हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें हिंदी बोल सकते हैं शशि थरूर19 सितंबर, 2005 | पहला पन्ना महासचिव पद की दौड़ में भारत भी15 जून, 2006 | भारत और पड़ोस पंडित नेहरू की बरसी पर विशेष27 मई, 2004 | भारत और पड़ोस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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