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पंडित नेहरू की बरसी पर विशेष | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पंडित नेहरू का 27 मई 1964 को निधन हो गया था. देश की विभिन्न नीतियों पर उनकी छाप स्पष्ट रही. उन्होंने भारत में न सिर्फ़ लोकतंत्र को मज़बूत करके उसे दुनिया के सबसे सशक्त लोकतंत्र बनने की राह दिखाई बल्कि विदेश में भारत की पहचान भी बनाई. उनकी बरसी पर बीबीसी हिंदी की विशेष प्रस्तुति- 'नेहरु की विदेश नीति ने दिलवाई भारत को पहचान'
जवाहरलाल नेहरु ने भारत की विदेश नीति को एक ऐसे अवसर के रुप में देखा जिसमें वे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रुप में स्थापित कर सकें. वैसे उनकी नीतियों में कुछ ख़ामियाँ भी थीं. 'नेहरू ने इंदिरा को राजनीतिक वारिस नहीं बनाया'
भारत की राजनीति में नेहरू-गाँधी ख़ानदान के महत्त्व पर काफ़ी चर्चा होती रही है मगर पंडित जवाहर लाल नेहरू की न तो कभी इच्छा थी और न ही वह समझते थे कि उनके बाद इंदिरा गाँधी प्रधानमंत्री बनेंगी. | इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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