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'गेंद अब मुशर्रफ़ के पाले में है' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आतंकवाद से निपटने के लिए पाकिस्तान के साथ मिल कर एक संयुक्त प्रणाली बनाने की जम कर हिमायत की और कहा है कि अब गेंद पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के पाले में है. उत्तरांचल के नैनीताल शहर में कांग्रेस के मुख्यमंत्रियों के दो दिवसीय सम्मेलन के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए उन्होंने ये विचार व्यक्त किए. बातचीत के दौरान आंतरिक सुरक्षा का मुद्दा मुख्य तौर पर छाया रहा. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि आतंकवाद का ख़तरा बरकरार है और इसके लिए देश जितना तैयार रह सकता है उतनी तैयारी ज़रूर है. उन्होंने ख़ुफिया और पुलिस तंत्र को और आधुनिक और प्रभावशाली बनाने की ज़रूरत पर बल दिया. आतंकवाद पर नियंत्रण लाने के लिए पाकिस्तान के साथ एक संयुक्त प्रणाली बनाने के लिए किए गए समझौते की विपक्ष ने आलोचना की थी. प्रधानमंत्री ने इसका जवाब देते हुए कहा, "न भारत जम्मू-कश्मीर के इलाक़े में पाकिस्तान से लगी सीमा में कोई फेरबदल स्वीकार करेगा और न पाकिस्तान नियंत्रण रेखा को स्थायी सीमा बनाने के पक्ष में है. हाथ पर हाथ धरे बैठना भारत के हित में नहीं है लेकिन पाकिस्तान के साथ बातचीत करने के अलावा और कोई विकल्प भी नहीं है." उन्होंने आंतरिक सुरक्षा को पुख़्ता करने के लिए पोटा जैसा कोई क़ानून लाने की संभावना को ख़ारिज कर दिया. कृषि सुधार कृषि क्षेत्र में सुधारों की चर्चा करते हुए मनमोहन सिंह ने कहा कि विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने उन्हें अपने राज्यों की समस्याओं से अवगत कराया है और यह तय किया गया है कि सरकार किसानों को राहत देने को सबसे बड़ी प्राथमिकता बनाए. प्रधानमंत्री ने कहा, "भूमि सुधार के साथ ही किसानों को आसान कर्ज़ उपलब्ध कराना सबसे आवश्यक है ताकि उन्हें कर्ज़ के बोझ से उबारा जा सके." हालांकि जिन्हें कांग्रेसी मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन से किसी ठोस नीति या किसानों के लिए आर्थिक पैकेज की घोषणा की उम्मीद थी उन्हें निराशा हुई होगी. कर्ज़ के बोझ से तंग आकर आत्महत्या करने के लिए प्रेरित होने वाले किसानों के परिवारों को इससे कितनी राहत मिलेगी यह देखने की बात है. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने विशेष आर्थिक क्षेत्रों के निर्माण के लिए उपजाऊ भूमि दिए जाने के ख़िलाफ़ कांग्रेसी मुख्यमंत्रियों को आगाह किया. आगे की रणनीति साथ ही दोनों नेताओं ने कुछ अटकलों को भी समाप्त किया. मिसाल के तौर पर सोनिया गांधी ने स्पष्ट कर दिया कि केंद्र सरकार का उप-प्रधानमंत्री पद बनाने का कोई इरादा नहीं है. शनिवार को तेलंगाना राष्ट्र समिति ने यूपीए सरकार से समर्थन वापसी की घोषणा की थी. इसपर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि टीआरएस के लिए अभी भी दरवाज़े खुले रखे गए हैं. सोनिया गांधी ने कहा, "जहाँ तक कांग्रेस का संबंध है वो तेलंगाना राज्य के गठन के लिए यूपीए के सभी घटक दलों के बीच आम सहमति बनाने का प्रयास कर रही है. कांग्रेस ने तेलंगाना के गठन के मामले में कोई वादा नहीं तोड़ा है और टीआरएस के लिए उनके दरवाज़े अभी भी खुले हैं." जिन राज्यों में अगले साल की शुरुआत में चुनाव होने वाले है वहां कांग्रेस क्या रणनीति अपनाएगी, इस मुद्दे पर सम्मेलन में हुई चर्चा पर पार्टी लगभग मौन रही. | इससे जुड़ी ख़बरें 'ख़ुफ़िया एजेंसियों में और अल्पसंख्यक हों'23 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस आंतरिक सुरक्षा और कृषि पर ज़ोर23 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस जम्मू कश्मीर गठबंधन सरकार मुश्किल में 31 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल से उत्साहित हैं भारत के नक्सलवादी07 जून, 2006 | भारत और पड़ोस छत्तीसगढ़ के नए क़ानून की निंदा27 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस चरमपंथी हमलों का ख़तरा: मनमोहन05 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस अधिकारों की लड़ाई या राजनीति19 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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