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'ख़ुफ़िया एजेंसियों में और अल्पसंख्यक हों' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि पुलिस और ख़ुफ़िया एजेंसियों में अल्पसंख्यकों की संख्या बढ़ानी होगी. वे उत्तरांचल के नैनीताल शहर में कांग्रेस प्रशासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के दो दिवसीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे. प्रधानमंत्री ने कहा कि मुस्लिम समुदाय में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है. इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कृषि क्षेत्र में विकास और सुधार पर भी बल दिया. उन्होंने किसानों की आत्महत्या की घटनाओं पर चिंता जताई. दोनों नेताओं ने आंतरिक सुरक्षा और अल्पसंख्यक समुदाय में असुरक्षा की भावना को समाप्त करने के उपाय करने की भी प्रतिबद्धता दोहराई है. अल्पसंख्यकों की सुरक्षा कार्यक्रम के एजेंडे से अलग हटकर जो महत्वपूर्ण बात दोनों नेताओं ने की- वो थी अल्पसंख्यकों की सुरक्षा. सोनिया गांधी ने आगाह किया कि आतंरिक सुरक्षा पुख़्ता करने के लिए और चरमपंथी गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए कड़े क़दम उठाते समय सुरक्षा बलों को ऐहतियात बरतनी होगी. उन्होंने कहा कि ये ख़्याल रखना होगा कि वो देश के अल्पसंख्यकों को ख़ासतौर पर मुसलमानों में असुरक्षा की भावना तो नही बढ़ा रहे. उन्होंने कहा कि इससे देश के समुदायों में दूरियाँ बढ़ने का ख़तरा है. इस पर अंकुश लगाने का सुझाव देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, "अब समय आ गया है कि हमें पुलिस और ख़ुफ़िया एजेंसियों में अल्पसंख्यकों की संख्या बढ़ाने के बारे में सोचना चाहिए." प्रधानमंत्री ने सम्मेलन में मौजूद 14 कांग्रेसी मुख्यमंत्रियों और कई केंद्रीय मंत्रियों को संबोधित करते हुए कहा है कि सरकार योजनाएँ और सहायता पैकेज तो बना रही है लेकिन उसका लाभ ज़रूरतमंदों को पहुँचे यह सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्रियों को अपने अपने राज्यों में निजी तौर पर निगरानी रखनी होगी. मुद्दे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कार्यक्रम के घोषित एजेंडे के अनुसार दो मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की. एजेंडे में सबसे ऊपर था-कृषि क्षेत्र की चिंताजनक स्थिति का मुद्दा. अपने भाषण में दोनों नेताओं ने कृषि क्षेत्र के विकास के लिए कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार की ओर से किए गए कामों की फ़ेहरिस्त गिनाई. लेकिन सोनिया गांधी ने स्वीकार किया कि जब तक इस क्षेत्र में व्यापक सुधार नहीं होते, कर्ज़ के बोझ तले दबे किसानों को राहत नहीं मिल सकती. उन्होंने कहा, "कुछ राज्यों में कर्ज़ के बोझ तले दबे किसानों की आत्महत्या की वारदातों को रोकना राज्य और केंद्र सरकार के लिए एक प्रमुख चुनौती है. अभी भी छोटे किसानों के लिए आसान कर्ज़ के रास्ते काफ़ी कम हैं." उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और केरल के कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री से किसानों की आत्महत्या की वारदातों से प्रभावित इलाकों के लिए सहायती की माँग रखी थी और प्रधानमंत्री जल्द ही सहायता पैकेज की घोषणा करेंगे. सोनिया गांधी ने कहा कि नक्सली समस्या भी सीधे तौर पर ग्रामीण इलाकों के विकास न हो पाने से जुडी है. नक्सली हिंसा पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, "नक्सलवादियों का बढ़ता प्रभाव चिंता का विषय है और ख़तरनाक बात यह है कि वो पहले की अपेक्षा ज़्यादा संगठित हो रहे हैं और आधुनिक उपकरणों और हथियारों का इस्तेमाल करने लगे हैं." | इससे जुड़ी ख़बरें आंतरिक सुरक्षा और कृषि पर ज़ोर23 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस जम्मू कश्मीर गठबंधन सरकार मुश्किल में 31 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल से उत्साहित हैं भारत के नक्सलवादी07 जून, 2006 | भारत और पड़ोस छत्तीसगढ़ के नए क़ानून की निंदा27 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस चरमपंथी हमलों का ख़तरा: मनमोहन05 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस अधिकारों की लड़ाई या राजनीति19 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस अगस्त में आत्महत्या के सर्वाधिक मामले01 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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