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विमोचन से पहले ही मुशर्रफ़ की किताब पर बहस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ की किताब 'इन द लाइन ऑफ़ फ़ायर' का विमोचन आज अमरीका में होना है. लेकिन किताब आने से पहले ही इस पर विवाद शुरू हो गया है. इस किताब के कुछ अंश कई अख़बारों में छपे हैं और कई वरिष्ठ पत्रकारों को इसे पढ़ने का भी मौक़ा मिला है. पाकिस्तान के राष्ट्रपति मुशर्रफ़ कई दिनों से विदेश दौरे पर हैं. पहले वे क्यूबा की राजधानी हवाना में गुटनिरपेक्ष देशों के सम्मेलन में शामिल हुए, फिर न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया और अभी किताब जारी करने को लेकर अमरीका में ही हैं. पाकिस्तान में रविवार को उनके ख़िलाफ़ विद्रोह की ख़बरों ने भी ज़ोर पकड़ा. लेकिन पाकिस्तान की सरकार और राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने इसका खंडन किया है. दरअसल रविवार दोपहर को पाकिस्तान के कई हिस्सों में एकाएक बिजली गुल हो गई. कई घंटे तक बिजली गुल रही. टेलीविज़न कार्यक्रम रुक गए और इंटरनेट भी बंद हो गया. राष्ट्रपति मुशर्रफ़ की अनुपस्थिति में इस अफ़वाह ने ज़ोर पकड़ा कि उनके ख़िलाफ़ बग़ावत हो गई है. लेकिन पाकिस्तान सरकार और राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने इन ख़बरों का खंडन किया है. किताब पर बहस इन अफ़वाहों के अलावा उनकी आने वाली किताब को लेकर भी बहस का दौर शुरू हो गया है. इस किताब में करगिल युद्ध, पाकिस्तान की परमाणु शक्ति और 11 सितंबर के हमलों के बाद पाकिस्तान की कूटनीति के बारे में 'कई जानकारियों' की चर्चा है. पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार हामिद मीर इस किताब को पढ़ चुके हैं, उनका कहना है कि इसका ज़्यादा हिस्सा करगिल युद्ध पर केंद्रित है. उन्होंने बीबीसी से कहा, "इस किताब से भारत-पाकिस्तान के रिश्तों पर भी असर पड़ेगा. पुस्तक के ज़रिए यह साबित करने की कोशिश की गई है कि करगिल में पाकिस्तानी फ़ौज की जीत हुई." वो कहते हैं कि जनरल मुशर्रफ़ ने अपन किताब में पहली बार इस बात का ज़िक्र किया है कि करगिल में मुजाहिदीनों को पाकिस्तानी फ़ौज से सीधी मदद मिल रही थी. हामिद मीर मानते हैं कि इस तरह की बातों से भारत और पाकिस्तान के बीच अभी अमन का जो माहौल है उसे धक्का पहुँचेगा.
वो कहते हैं, "जनरल मुशर्रफ़ अपनी किताब में बता रहे हैं कि 1999 में करगिल युद्ध के समय पाकिस्तान की परमाणु क्षमता ऑपरेशनल (क्रियाशील) नहीं हुई थी. मतलब अगर भारत हमला करता तो पाकिस्तान उसका जवाब नहीं दे सकता था." मीर मानते हैं कि 11 सितंबर की घटना के बाद की गतिविधियों का जो इस किताब में जिक्र है उसका असर पाकिस्तान और अमरीका के रिश्तों पर पड़ेगा. वो कहते हैं, "पुस्तक में रिचर्ड आर्मिटेज़ की धमकी का ज़िक्र है जिसमें उन्होंने पाकिस्तान पर बमबारी की बात कही है. इसके अलावा मुशर्रफ़ कहते हैं कि उस समय के अमरीकी विदेश मंत्री कॉलिन पावेल ने उनसे भी इसी तरह की बात कही थी." मीर कहते हैं कि निश्चित रुप से यह किताब पाकिस्तान में कई विवादों को जन्म देने वाली है. |
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