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'संघर्ष फैला, मुस्लिम इलाक़े से भागे' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका की सेना और तमिल विद्रोहियों के बीच देश के पूर्वोउत्तर इलाक़े त्रिंकोमाली में चल रहा संघर्ष पास के एक कस्बे में भी फैल गया है. मुत्तुर कस्बे के लोगों को कहना है कि विद्राहियों ने वहाँ के कई अहम ठिकानों पर कब्ज़ा कर लिया है. मुत्तुर मुस्लिम बहुल इलाका है. बीबीसी से बातचीत में स्थानीय लोगों ने बताया है कि कई लोगों ने मस्जिदों और स्कूली इमारतों में शरण ली है. संघर्ष में आई तेज़ी के बावजूद श्रीलंकाई सेना और तमिल विद्रोहियों का कहना है कि वे आत्मरक्षा में ऐसा कर रहे हैं और ये 2002 के संघर्षविराम की शर्तों के दायरे में है. मुत्तुर में नागरिकों का कहना है कि कस्बे से सेना हट चुकी है.इससे पहले श्रीलंका सरकार ने अपनी वेबसाइट पर लिखा था कि ‘कस्बा उसके नियंत्रण’ में है हालांकि वहाँ मोर्टार से हमले हो रहे हैं. लेकिन तमिल विद्रोहियों के प्रवक्ता ने एएफ़पी को बताया कि उन्हें इस इलाक़े में काफ़ी सफलता मिली है. जबकि श्रीलंका रक्षा मंत्रालय के मुताबिक सेना के अड्डों पर हमले की कोशिश को विफल कर दिया गया है. विवाद इस संघर्ष में हताहत हुए लोगों के बारे में भी अलग अलग बातें सामने आ रही हैं. श्रीलंका सरकार का कहना है कि संघर्ष में 40 विद्रोही मारे गए हैं. त्रिंकोमाली जि़ले में करीब आठ दिन पहले ये संघर्ष तब शुरू हुआ था जब वायु सेना ने तमिल विद्रोहियों के ठिकानों पर बमबारी की थी. श्रीलंका सरकार का कहना है कि तमिल विद्रोही मालीवारू क्षेत्र से अन्य इलाकों में पानी को छोड़े जाने से रोक रहे हैं. मालीवारू क्षेत्र के आसपास विद्रोहियों का नियंत्रण है जबकि जिन क्षेत्रों के लिए पानी नहीं छोड़ा जा रहा है उस पर सरकार का नियंत्रण है. तमिल विद्रोहियों का कहना है कि पानी की सप्लाई में सुधार को लेकर स्थानीय लोगों का सरकार के साथ विवाद है. और इसी के चलते स्थानीय लोगों ने पानी का बहाव रोक रखा है. इस बीच श्रीलंका सरकार ने एक बयान में कहा है कि वो संघर्षविराम के प्रति वचनबद्ध है. श्रीलंका सेना का कहना है मंगलवार को एक जहाज़ पर उस वक़्त हमला किया गया जब वो जाफ़ना से त्रिंकोमाली जा रहा था. उसमें 850 सैनिक सवार थे. सेना के मुताबिक हमले में नौसेना के चार लोग मारे गए. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि सैनिक बारूदी सुरंगों से पटी ज़मीन पर लड़ने की कोशिश कर रहे हैं.जबकि विद्रोहियों ने इसे युद्ध की कार्रवाई बताया. वहीं श्रीलंका निगरानी मिशन ने इसे 'छोटे स्तर' पर चलने वाला संघर्ष बताया और कहा है कि पूर्ण स्तर पर अगर युद्ध हुआ तो ये दोनों पक्षों के लिए 'घातक' होगा. |
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