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रविवार, 30 जुलाई, 2006 को 21:45 GMT तक के समाचार
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श्रीलंका का विद्रोहियों के ख़िलाफ़ अभियान
श्रीलंका सेना
श्रीलंका सेना ने संघर्ष विराम लागू होने के बाद पहली बार ऐसा अभियान छेड़ा है
श्रीलंका की सेना ने एक नहर को मुक्त कराने के लिए तमिल विद्रोहियों के ख़िलाफ़ ज़मीनी सैन्य अभियान छेड़ा है.

इसके पहले श्रीलंका की वायु सेना ने चार दिनों तक तमिल विद्रोहियों पर बमबारी की थी.

श्रीलंका सरकार का कहना है कि ये अभियान इस नहर को मुक्त कराने के लिए छेड़ा गया था. उनका कहना है कि विद्रोहियों ने त्रिंकोमाली ज़िले के उत्तर पूर्वी इलाक़े में पानी रोक रखा है.

सन् 2002 में संघर्ष विराम लागू करने के बाद श्रीलंका सेना का यह पहला इस तरह का अभियान है. श्रीलंका सरकार इस अभियान को मानवीय हस्तक्षेप क़रार दे रही है.

त्रिंकोमाली ज़िले के हज़ारों किसान पानी के रोके जाने से प्रभावित हो रहे हैं. ये इलाक़ा विद्रोहियों और सरकार के नियंत्रणवाले क्षेत्र के बीच में पड़ता है.

शांति प्रक्रिया को झटका

इधर श्रीलंका में शांति प्रक्रिया को डेनमार्क और फिनलैंड के अपने पर्यवेक्षकों को संघर्षविराम निगरानी मिशन से वापिस बुलाने की घोषणा से झटका लगा है.

श्रीलंका निगरानी मिशन में पाँच देशों के पर्यवेक्षक हैं जिनमें से तीन यूरोपीय संघ के सदस्य देश हैं.

यूरोपीय संघ ने तमिल विद्रोहियों के संगठन एलटीटीई को "आतंकवादी संगठन" क़रार दे दिया है जिसके बाद तमिल विद्रोहियों ने माँग की थी कि यूरोपीय संघ के सदस्य देश अपने पर्यवेक्षक श्रीलंका से वापिस बुला लें.

डेनमार्क और फिनलैंड के इस फ़ैसले के बाद श्रीलंका निगरानी मिशन के सदस्यों की संख्या लगभग एक तिहाई हो जाएगी. इस मिशन में लगभग साठ लोग हैं.

ग़ैरयूरोपीय सदस्य देशों नॉर्वे और आइसलैंड ने कहा है कि वे इस कमी को नहीं पूरा कर सकते हैं.

इसके बाद यह आशंका पैदा हो गई है कि पहले से ही नाज़ुक हो चुका संघर्षविराम और कमज़ोर हो जाएगा.

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