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एलटीटीई ने स्वीडन की अपील ठुकराई | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका में तमिल चरमपंथी संगठन एलटीटीई ने संघर्षविराम के निरीक्षकों को देश में रहने देने की स्वीडन की अपील को ख़ारिज कर दिया है. स्वीडन ने एलटीटीई से अपील की थी कि वह अपने उस फ़ैसले पर पुनर्विचार करे जिसके तहत यूरोपीय संघ के निरीक्षकों को एक सितंबर तक वापस बुलाए जाने को कहा गया था. ये फ़ैसला यूरोपीय संघ के एलटीटीई को 'आतंकवादी' संगठनों की सूची में शामिल करने के बाद लिया गया था. एलटीटीई के राजनीतिक प्रमुख एसपी तमिलसेलवम के हवाले से एलटीटीई समर्थक वेबसाइट तमिलनेट में कहा गया है, "एलटीटीई के रवैए में कोई बदलाव नहीं है." उनके हवाले से ये भी कहा गया कि शांति निरीक्षकों को डेनमार्क, फ़िनलैंड और स्वीडन से चुनने का आधार इनका संघर्ष कर रहे पक्षों के बीच निष्पक्ष रह पाना था. एलटीटीई ने स्वीडन के दूत एंडर्स औजोलुंद को इस मुद्दे पर अपने रवैए से अवगत करवा दिया है. हाल में श्रीलंका में बढ़ी हिंसा के बाद तमिल विद्रोहियों और सरकार के बीच तनाव बढ़ गया है जिससे वर्ष 2002 में हुए संघर्षविराम के भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं. |
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