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तमिल विद्रोहियों के ठिकानों पर हमले तेज़ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
गुरुवार को एक यात्री बस में हुए भीषण विस्फोट के बाद श्रीलंकाई वायुसेना ने तमिल विद्रोहियों के ठिकानों पर हमले तेज़ कर दिए हैं. इस जवाबी कार्रवाई में वायुसेना के विमानों ने उत्तरी श्रीलंका में किलिनोच्ची में तमिल विद्रोहियों के हवाईपट्टी के पास कम से कम पाँच बम गिराए हैं. इसके अलावा पूर्वी हिस्से में सामपुर में ज़मीनी हमले भी किए गए हैं. किसी के हताहत होने की ख़बरें नहीं हैं. गुरुवार को एक यात्री बस में हुए शक्तिशाली विस्फोट में 64 से लोग मारे गए थे और 80 से अधिक घायल हुए थे. हालांकि तमिल विद्रोहियों के संगठन एलटीटीई ने इन हमलों के पीछे हाथ होने से इंकार किया था लेकिन सरकार ने उनको दोषी ठहराते हुए गुरुवार को ही तमिल ठिकानों पर हवाई हमलों की शुरुआत कर दी थी. तमिल विद्रोहियों ने कहा था कि इस बस पर हमला उस अर्द्धसैनिक बल का काम हो सकता है जो सरकार के साथ जुड़ा हुआ है. संघर्ष विराम की ज़रुरत संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने कहा है कि गुरुवार को हुए विस्फोट से ज़ाहिर होता है कि श्रीलंका में संघर्ष विराम को फिर से लागू करने की कितनी ज़रुरत है.
उन्होंने कहा है कि श्रीलंका को वापस गृहयुद्ध में जाने से रोकने के लिए इसकी सख़्त ज़रुरत है. कूटनयिक मानते हैं कि वर्ष 2002 में तमिल विद्रोहियों और श्रीलंका सरकार के बीच हुई युद्धविराम संधि अब ख़त्म हो गया है. हालांकि श्रीलंका सरकार अभी भी इसे लागू मानती है और सरकारी प्रवक्ता केहेलिया रामबुकवेल्ला ने कहा है कि सरकार को 2002 में की गई युद्धविराम संधि पर गंभीरता से विचार करना होगा. अप्रैल में शांतिवार्ता में बाधा आने के बाद से श्रीलंका में सेना और तमिल विद्रोहियों के बीच तनाव बढ़ा है और इसके बाद से श्रीलंका में विस्फोटों की कई घटनाएँ हुई हैं. हाल ही में नॉर्वे में शांतिवार्ता की एक और कोशिश हुई थी लेकिन वो असफल रही. |
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