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श्रीलंका संकट पर ओस्लो बातचीत टूटी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नॉर्वे के मध्यस्थकारों का कहना है कि श्रीलंका सरकार और तमिल विद्रोहियों को ओस्लो में शांति वार्ता के लिए एक मंच पर लाने की उनकी कोशिश कामयाब नहीं हो सकी है. श्रीलंका सरकार के प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि तमिल विद्रोहियों ने मुलाक़ात करने से इनकार कर दिया है और सरकार उनके इस रुख़ से चकित है. श्रीलंका में दोनों पक्षों के बीच युद्धविराम की निगरानी करने वालों की सुरक्षा पर विचार करने के लिए ओस्लो में दो दिन की यह बैठक आयोजित की गई थी. श्रीलंका सरकार और तमिल विद्रोहियों के बीच शांति वार्ता का पिछला दौर फ़रवरी 2006 में हुआ था लेकिन उसके बाद से हिंसा में ख़ासी तेज़ी आई है. गत गुरूवार को ही हिंसा में तीन लोगों की मौत हो गई थी. नॉर्वे सरकार के एक प्रवक्ता एस्पेन गुल्लीक्सताड ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा, "तमिल विद्रोही और श्रीलंका सरकार ने नॉर्वे में हुई बैठक को बिना भाग लिए ही समाप्त घोषित कर दिया है." प्रवक्ता ने कहा कि नॉर्वे दोनों पक्षों के साथ अलग-अलग बातचीत जारी रखेगा. श्रीलंका सरकार के प्रतिनिधिमंडल के अध्यक्ष पलिता कोहाना ने बीबीसी की तमिल सेवा से कहा, "हमें उम्मीद है कि बातचीत बहुत जल्द ही फिर से शुरू हो सकेगी." श्रीलंका सरकार ने यह भी कहा है कि उन्हें सूचना मिली है कि तमिल विद्रोहियों ने युद्धविराम के निगरानी करने वालों में स्वीडन, फ़िनलैंड और डेनमार्क के लोगों को शामिल करने पर आपत्ति की है. ग़ौरतलब है कि ये देश यूरोपीय संघ के सदस्य हैं और यूरोपीय संघ ने पिछले सप्ताह ही तमिल विद्रोहियों को 'प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों' की सूची में रखा है. हिंसा पिछले कई महीनों से तमिल विद्रोहियों को बातचीत के लिए तैयार करने की कोशिशें की जा रही थीं. श्रीलंका नौसेना के एक बेड़े पर मई में विद्रोहियों ने हमला किया था, उसमें पर्यवेक्षक यात्रा कर रहे थे. चार साल पहले श्रीलंका सरकार और तमिल विद्रोहियों की बीच युद्धविराम पर सहमति हुई थी लेकिन हाल में दोनों पक्षों के बीच हिंसा की अनेक घटनाएँ हुई हैं. पिछले दो महीनों की हिंसा में दोनों पक्षों के 300 से अधिक लोग मारे गए हैं. मंगलवार को विद्रोहियों के नियंत्रणवाले पूर्वी श्रीलंका में एक बारूदी सुरंग के फटने से 10 तमिल मारे गए थे और 13 घायल हो गए थे. विद्रोहियों के एक प्रवक्ता ने इसके लिए सेना को दोषी ठहराया था. दूसरी ओर सेना के प्रवक्ता ने इस आरोप को बेबुनियाद बताया था. तमिल विद्रोहियों के प्रवक्ता दया मास्टर ने सेना पर बारूदी सुरंग बिछाने का आरोप लगाते हुए कहा था, "यह वाहनों को उड़ाने वाली बारूदी सुरंग थी. ट्रैक्टर से जा रहे लोग इसकी चपेट में आ गए." दूसरी ओर सेना के प्रवक्ता प्रसाद समरसिंघे ने आरोप बेबुनियाद बताते हुए कहा, "सुरक्षा बल उन इलाक़ों में नहीं जाते हैं." बीबीसी संवाददाता का कहना है कि यदि पर्यवेक्षक युद्धविराम की निगरानी नहीं करते हैं तो स्थिति और ख़राब हो सकती है. | इससे जुड़ी ख़बरें धमाके में 'नौ तमिलों की मौत'07 जून, 2006 | भारत और पड़ोस श्रीलंका में नौसैनिक अड्डे के बाहर धमाका06 जून, 2006 | भारत और पड़ोस आठ तमिल विद्रोही जेल से भाग निकले04 जून, 2006 | भारत और पड़ोस श्रीलंका में कठिन है शांति की राह12 मई, 2006 | भारत और पड़ोस एलटीटीई के साथ आपात बैठक12 मई, 2006 | भारत और पड़ोस एलटीटीई का नौसैनिक बेड़े पर बड़ा हमला11 मई, 2006 | भारत और पड़ोस जापानी दूत की विद्रोहियों से मुलाक़ात09 मई, 2006 | भारत और पड़ोस इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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