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सरकार को एलटीटीई की माँग नामंज़ूर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका सरकार ने तमिल विद्रोहियों के संगठन लिबरेशन टाइगर्स ऑफ़ तमिल ईलम (एलटीटीई) की यूरोपीय संघ के पर्यवेक्षकों को बदलने की माँग को ठुकरा दिया है. यूरोपीय संघ के ये पर्यवेक्षक श्रीलंका में सरकार और तमिल विद्रोहियों के बीच युद्धविराम पर नज़र रखे हुए हैं. पिछले महीने यूरोपीय संघ ने एलटीटीई को 'आतंकवादी संगठनों' की सूची में डाल दिया था. इसी के कारण एलटीटीई पर्यवेक्षकों को एक महीने के भीतर ही बदलने की माँग कर रहा है. लेकिन श्रीलंका सरकार ने एलटीटीई की इस माँग को 'अव्यवहारिक' बताया है. इस बीच संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि एलटीटीई से टूटकर अगल हुआ धड़ा बच्चों का अपहरण करके उन्हें अपनी सेना में शामिल कर रहा है. सरकार की सफ़ाई श्रीलंका में पर्यवेक्षकों के दल में पाँच देशों के लोग हैं. इसमें से तीन यूरोपीय संघ के सदस्य देश हैं. श्रीलंका सरकार ने एक बयान जारी करके इस बात की सफ़ाई दी है कि सरकार क्यों पर्यवेक्षकों को नहीं बदलना चाहती. सरकार का कहना है कि मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे नॉर्वे के साथ समहति बनी थी कि पर्यवेक्षक छह महीनों में बदले जाएँगे लेकिन तमिल विद्रोहियों ने नॉर्वे से कहा है कि वे एक महीने के भीतर परिवर्तन चाहते हैं. तमिल विद्रोही कह रहे हैं कि पर्यवेक्षकों में यूरोपीय संघ के सदस्य देशों में से कोई नहीं होना चाहिए. इस मतलब ये हैं कि फ़िनलैंड, स्वीडन और डेनमार्क का कोई भी पर्यवेक्षक न हो. दो और देश नॉर्वे और आइसलैंड हैं. नॉर्वे ने कहा है कि वो इस महीने के अंत में यूरोपीय संघ के अधिकारियों से इस संबंध में बात करेगा. | इससे जुड़ी ख़बरें शांति वार्ता की पेशकश के बीच गोलीबारी19 जून, 2006 | भारत और पड़ोस श्रीलंका सेना और विद्रोहियों में संघर्ष17 जून, 2006 | भारत और पड़ोस श्रीलंका में कठिन है शांति की राह12 मई, 2006 | भारत और पड़ोस जापानी दूत की विद्रोहियों से मुलाक़ात09 मई, 2006 | भारत और पड़ोस दोनों पक्षों से शांतिवार्ता की अपील28 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस श्रीलंका समय चक्र - 112 मई, 2006 | भारत और पड़ोस श्रीलंका समय चक्र - 212 मई, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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