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एक अन्य पहलू भी है श्रीलंका का | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कोलंबो में आप अगर अपने गंतव्य तक समय से पहुँच जाएँ तो यह आपकी अच्छी किस्मत का कमाल होगा. देश में दो दशकों से जारी जातीय संघर्ष का हल भी ग्रहों-नक्षत्रों के हाथ है और आप अगर रातोंरात अमीर होना चाहते हैं तो आपकी किस्मत कैसीनो के खेल और घुड़दौड़ पर निर्भर है. श्रीलंका में ग्रह-नक्षत्र, सट्टा और किस्मत हर कदम पर आपके साथ हैं. यहाँ तक की यहाँ की संसद के अध्यक्ष डब्ल्यूजेएम लोकूबंडारा का मानना है कि देश पर ढाई वर्षों के लिए शनि की दशा चल रही है और नवंबर से दिन सुधरेंगे. शायद शांति भी लौट आए. इस बौद्ध-बहुल्य देश में सट्टे पर प्रतिबंध है पर कोलंबो में कई कैसीनो धड़ल्ले से चल रहे हैं. कागज़ पर यह केवल विदेशियों के लिए है पर असलियत कुछ और ही. यहाँ घुड़दौड़ पर पैसा लगाना भी मना है पर आपको जगह-जगह टर्फ़ एकाउंटेट नज़र आ जाते हैं. होता यह है कि इंग्लैंड की घुड़दौड़ पर पैसा लगता है और लुटता है और इस खेल में आम आदमी ही नहीं बड़े-बड़े नेताओं की मिलीभगत की फुसफुसाहट भी सुनाई देती है. धारावाहिकों की धार आप इसे राष्ट्रीय शौक कह सकते हैं और जब इससे लोगों को फ़ुरसत मिलती है तो वे टेलीविज़न से मंत्रमुग्ध हो जाते हैं. लोगों की निगाहें ख़ासकर तमिल और हिंदी में प्रसारित फ़िल्मों और सीरियलों पर टिकी होती हैं. कई सीरियलों को तो सिंहली भाषा में डब कर के परोसा जा रहा है. यहाँ के केबल ऑपरेटर ख़ूब पैसा बना रहे हैं और स्थानीय सिनेमा और सीरियल निर्माता इस विदेशी प्रतियोगिता को पचा नहीं पा रहे हैं. देश में कई सिनेमाघर हाल के दिनों में बंद हो गए हैं. 'वाटर' और 'कृष' जैसी फ़िल्में सिनेमाघरों में दिखाई जा रही है पर अब स्थानीय मनोरंजन मीडिया को बचाने के लिए सरकार ने विदेशी चैनलों पर एक कर लगा दिया है. सात दिनों में 30 लाख रुपए सरकार ने जमा कर लिए हैं. दलील यह है कि ये धन यहाँ के सिनेमा और धारावाहिक निर्माताओं की मदद करेगा. केबल ऑपरेटर इसका विरोध तो कर रहे हैं पर जानते हैं कि कुछ पैसा वे दे भी दें तो भी उनकी जेब खनखनाती रहेगी. हो भी क्यों न, सास-बहु का जादू यहाँ भी चल रहा है. मीडिया की ताक़त मीडिया की ताक़त का अंदाज़ा श्रीलंका सरकार को तो है ही, तमिल विद्रोहियों को भी है.
दोनों ज़बरदस्त प्रचार अभियान चलाते हैं. इस प्रचार युद्ध में जीत और हार का फ़ैसला तो नहीं किया जा सकता पर टक्कर काँटे की है. सरकार तमिल विद्रोहियों का कहर दिखाने वाले वीडियो प्रसारित कहती है. पत्रकारों को रोज़ बताती है कि एलटीटीई ने कहाँ पर क्या ज़्यादती की है. और तो और, अब इंटरनेट का भी जमकर प्रयोग हो रहा है. तमिल विद्रोही लगातार अपनी वेबसाइट को अपडेट करते हैं तो सरकार हर दो घंटों में. दोनों पक्ष अख़बार चलाते हैं और प्रचार के नए नए तरीके़ भी ढूँढते हैं. यहाँ के सूचना प्रसारण मंत्री कहते हैं कि एलटीटीई के ख़िलाफ़ प्रचार पर अच्छा ख़ास पैसा खर्च होता है पर कितना इसे वह स्पष्ट करना नहीं चाहते. | इससे जुड़ी ख़बरें अहम भूमिका निभाए भारत: राजपक्षे24 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस 'विद्रोहियों से किसी भी मुद्दे पर बातचीत' 04 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस संघर्षविराम के पर्यवेक्षकों की अहम बैठक29 जून, 2006 | भारत और पड़ोस श्रीलंका समस्या से जुड़े कुछ सवाल15 जून, 2006 | भारत और पड़ोस बारूदी सुरंग फटने से छह की मौत28 मई, 2006 | भारत और पड़ोस श्रीलंका समय चक्र - 112 मई, 2006 | भारत और पड़ोस श्रीलंका समय चक्र - 212 मई, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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