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संघर्षविराम के पर्यवेक्षकों की अहम बैठक | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका सरकार और तमिल विद्रोहियों के बीच चल रहे संघर्षविराम की निगरानी कर रहे पाँच देशों की एक अहम बैठक ओस्लो में होने जा रही है. गुरुवार को होने वाली इस बैठक में श्रीलंका में फिर से बढ़ती हिंसा के मद्देनज़र पर्यवेक्षकों या निगरानीकर्ताओं की भूमिका और सुरक्षा को लेकर चर्चा होनी है. हाल ही में यूरोपीय संघ ने तमिल विद्रोहियों के संगठन लिबरेशन टाइगर्स ऑफ़ तमिल ईलम (एलटीटीई) को 'आतंकवादी संगठनों' की सूची में शामिल कर लिया था. इसके बाद से तमिल विद्रोही यूरोपीय संघ के पर्यवेक्षकों को हटाने की माँग कर रहे हैं. इस वार्ता का आयोजन श्रीलंका की शांति प्रक्रिया में मध्यस्थता कर रहे नॉर्वे ने किया है. इसमें नॉर्वे के अलावा स्वीडन, फ़िनलैंड, डेनमार्क और आइसलैंड को भाग लेना है. इसमें से तीन देश डेनमार्क, स्वीडन और फ़िनलैंड यूरोपीय संघ के सदस्य हैं. तमिल विद्रोही इन तीनों देशों के पर्यवेक्षकों को हटाने की माँग की है. लेकिन श्रीलंका सरकार ने तमिल विद्रोहियों की इस माँग को ठुकरा दिया है. तमिल विद्रोहियों ने कहा है कि इन्हें सितंबर तक हटा लेना चाहिए. बीबीसी संवाददाता दुमित्रा लूथरा का कहना है कि जब सरकार और विद्रोही दोनों ही पर्यवेक्षकों की सुरक्षा की गारंटी न दे रहे हों तो इन तीनों देशों के अलावा और कोई चारा नहीं बचता कि वे अपने लोगों को वापस बुला लें. उनका कहना है कि इसके बाद ऐसे देश ढूँढ़ना भी मुश्किल काम होगा जो दोनों पक्षों को मंज़ूर हों. | इससे जुड़ी ख़बरें श्रीलंकाई राष्ट्रपति का विद्रोहियों पर आरोप27 जून, 2006 | भारत और पड़ोस राजीव की हत्या के लिए खेद है: एलटीटीई27 जून, 2006 | भारत और पड़ोस 'एलटीटीई के खेद जताने का मतलब नहीं'27 जून, 2006 | भारत और पड़ोस एलटीटीई समयसीमा बढ़ाने पर राज़ी24 जून, 2006 | भारत और पड़ोस शांति वार्ता की पेशकश के बीच गोलीबारी19 जून, 2006 | भारत और पड़ोस तमिल विद्रोहियों के ठिकानों पर हमले तेज़16 जून, 2006 | भारत और पड़ोस श्रीलंका संकट पर ओस्लो बातचीत टूटी08 जून, 2006 | भारत और पड़ोस श्रीलंका में नौसैनिक अड्डे के बाहर धमाका06 जून, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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