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राजीव की हत्या के लिए खेद है: एलटीटीई | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
तमिल अलगाववादी नेता एंटन बालासिंघम ने अपने संगठन की ओर से 1991 में पूर्व भारतीय प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के लिए भारत से माफ़ी मांगी है. उन्होंने राजीव गांधी की हत्या को एक ऐतिहासिक त्रासदी बताया है. उल्लेखनीय है कि 1991 में 21 मई को चेन्नई के पास श्रीपेरंबदूर में एक चुनावी जनसभा के दौरान एक आत्मघाती हमलावर ने राजीव गांधी की हत्या कर दी थी. तमिल छापामार श्रीलंका में भारतीय शांति सैनिक भेजने के राजीव गांधी के चार साल पहले के एक फ़ैसले से नाराज़ थे. संवाददाताओं के अनुसार ये पहली बार है कि एलटीटीई ने सार्वजनिक तौर पर राजीव गांधी की हत्या के लिए माफ़ी मांगी है. बहुत बड़ी त्रासदी भारतीय टेलीविज़न चैनल एनडीटीवी को एक साक्षात्कार में छापामारों के वरिष्ठ नेता एंटन बालासिंघम ने कहा, "जहाँ तक उस घटना की बात है, मैं कहूँगा कि वो एक बड़ी त्रासदी थी, एक बहुत बड़ी ऐतिहासिक त्रासदी, जिसके लिए हमें बेहत अफ़सोस है." उन्होंने आगे कहा, "हम भारत सरकार और भारत के लोगों से उदारता दिखाने और बीती बातों को भूल कर जातीय सवाल को एक नई दृष्टि से देखने की अपील करते हैं." एनडीटीवी के अनुसार बालासिंघम ने कहा कि तमिल छापामारों ने भारत को वचन दिया है कि वह उसके नेताओंको आगे से कभी निशाना नहीं बनाएगा. उन्होंने भारत से श्रीलंका शांति प्रक्रिया में सक्रिया भागीदारी की भी अपील की है. एनडीटीवी से ही बातचीत में भारत के विदेश राज्यमंत्री आनंद शर्मा ने कहा है कि राजीव गांधी की हत्या के लिए भारत तमिल छापामारों को कभी माफ़ नहीं करेगा. | इससे जुड़ी ख़बरें श्रीलंकाई राष्ट्रपति का विद्रोहियों पर आरोप27 जून, 2006 | भारत और पड़ोस श्रीलंका में कठिन है शांति की राह12 मई, 2006 | भारत और पड़ोस 'एलटीटीई विद्रोहियों ने विरोधियों को मारा'30 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस दोनों पक्षों से शांतिवार्ता की अपील28 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस श्रीलंका संकट पर नोर्वे में चर्चा28 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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