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मनमोहन सिंह ने राष्ट्र से माफ़ी मांगी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि 1984 के सिख विरोधी दंगों को लेकर उन्हें सिख समुदाय से और पूरे राष्ट्र से माफ़ी मांगने में कोई झिझक नहीं है. उन्होंने राज्यसभा में नानावती आयोग पर चल रही चर्चा के दौरान दोहराया कि जो कुछ हुआ वह पूरे राष्ट्र के लिए शर्म की बात थी. उन्होंने कहा, "प्रतिपक्ष के नेता ने कहा है कि मुझे माफ़ी मांगनी चाहिए तो मैं बताना चाहता हूँ कि पाँच छह साल पहले मैं कांग्रेस अध्यक्ष के साथ हरमंदर साहब गया था और वहाँ हमने सर झुकाकर कहा था कि हमें वे रास्ता दिखाएँ कि जो कुछ हुआ वैसा कभी न हो." मनमोहन सिंह ने कहा, "मुझे न केवल सिख समुदाय से बल्कि पूरे भारत राष्ट्र से फिर माफ़ी मांगने में कोई झिझक नहीं है." उन्होंने कहा, "जो कुछ हुआ वह राष्ट्रीय भावना के ख़िलाफ़ था और इसलिए सरकार और राष्ट्र की ओर से मेरा सर शर्म से झुक जाता है." प्रधानमंत्री ने कहा, "सभी को चाहिए कि इसके लिए आत्मावलोकन करें और देखें कि 1984 जैसे दंगे देश में कभी न हों". उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की हत्या को 'राष्ट्रीय त्रासदी' बताया और इसके बाद देश भर में भड़के सिख विरोधी दंगों को 'राष्ट्र के लिए शर्मनाक' बताया. उन्होंने कहा कि एक राष्ट्र के सामने उतार चढ़ाव आते रहते हैं और हम अपने इतिहास को तो फिर से नहीं लिख सकते लेकिन हम अपने लिए एक बेहतर भविष्य तो रच सकते हैं. उन्होंने राज्यसभा में बहुत सी वही बातें कहीं जो उन्होंने कल लोकसभा में कही थी. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बुधवार को लोकसभा में कहा था '84 के सिख विरोधी दंगों के मामले में नानावती आयोग ने जिन लोगों के भी ख़िलाफ़ सबूत होने की बात कही है उनके ख़िलाफ़ सरकार हर संभव क़ानूनी क़दम उठाएगी. उन्होंने कहा था कि जिन लोगों को आयोग ने दोषी पाया है उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी और इसके लिए क़ानून मंत्रालय की सलाह ली जाएगी. प्रधानमंत्री सिंह ने बुधवार को भी कहा कि '84 में कुछ हुआ वह शर्मनाक था और वह राष्ट्र पर एक धब्बा था लेकिन इस का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. |
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