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विवाद के बाद टाइटलर ने इस्तीफ़ा दिया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
केंद्रीय मंत्री जगदीश टाइटलर ने नानावती आयोग की रिपोर्ट में उनका नाम शामिल होने पर उठे विवाद के बाद मंत्रिपद से इस्तीफ़ा दे दिया है. उन्होंने बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को अपना इस्तीफ़ा सौंपा और उसकी एक प्रति प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भी भेज दी. बाद में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सिफ़ारिश पर राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम ने उनका इस्तीफ़ा स्वीकार कर लिया. जगदीश टाइटलर ने नानावती रिपोर्ट में अपने नाम को लेकर हुए विवाद पर नाराज़गी जताते हुए कहा कि आयोग ने उनके दोषी होने का संदेह मात्र ज़ाहिर किया है और उसी शक के आधार पर जब प्रधानमंत्री जाँच कराना चाहते हों तो उनके लिए मंत्री बने रहना संभव नहीं था. "निर्दोष " बुधवार शाम अपना इस्तीफ़ा सौंपने के बाद उन्होंने बीबीसी हिंदी सेवा से कहा, "मैंने लिखा है कि ये झूठ के ऊपर बात हुई है. मगर मैं चाहूँगा की जाँच करिए, ताकि मैं अपने को निर्दोष साबित कर सकूँ." अपने को निर्दोष बताते हुए उन्होंने कहा, "मेरे पर 21 साल में किसी ने कोई आरोप नहीं लगाया है." उल्लेखनीय है कि मनमोहन सिंह ने लोकसभा में आश्वासन दिया था कि 84 के सिख विरोधी दंगों के मामले में नानावती आयोग ने जिन लोगों के भी ख़िलाफ़ सबूत होने की बात कही है उनके ख़िलाफ़ सरकार हर संभव क़ानूनी क़दम उठाएगी. उन्होंने कहा कि जिन लोगों को आयोग ने दोषी पाया है उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी और इसके लिए क़ानून मंत्रालय की सलाह ली जाएगी. प्रधानमंत्री सिंह ने कहा कि 84 में कुछ हुआ वह शर्मनाक था और वह राष्ट्र पर एक धब्बा था लेकिन इस पर राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश नहीं करना चाहिए. दबाव वामपंथी दलों की 1984 के दंगों की जाँच के लिए गठित नानावती आयोग की रिपोर्ट की सिफ़ारिशों के मद्देनज़र कार्रवाई करने की माँग के बाद आप्रवासी मामलों के केंद्रीय मंत्री जगदीश टाइटलर पर इस्तीफ़े के लिए दबाव बढ़ गया था. नानावती आयोग की रिपोर्ट में जगदीश टाइटलर के बारे में कहा गया है कि 1984 में सिख विरोधी दंगों में उनकी भूमिका शक के दायरे में है. आयोग का कहना है कि इस दंगे में वे शामिल भी हो सकते हैं हालांकि सरकार की ओर से कह दिया गया है कि संभावना के आधार पर किसी पर कार्रवाई नहीं हो सकती. लेकिन ख़ुद जगदीश टाइटलर का कहना है कि 84 के दंगों में उनकी कोई भूमिका नहीं थी और पिछले 21 सालों में नौ आयोग बने और किसी ने उनका नाम नहीं लिया. इसमें कांग्रेस के दो नेताओं जगदीश टाइटलर व सज्जन कुमार के दंगे में शामिल होने का इशारा किया गया है और दिल्ली के तत्कालीन उपराज्यपाल सहित कई पुलिस अधिकारियों को दोषी ठहराया है. |
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