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आयोग की रिपोर्ट के ख़िलाफ़ प्रदर्शन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नानावती आयोग की रिपोर्ट और उस पर सरकार की कार्रवाई रिपोर्ट के प्रति दंगा पीड़ितों और सिख संगठनों ने नाराज़गी जताते हुए विरोध प्रदर्शन किया है. प्रदर्शनकारियों ने आयोग का पुतला और रिपोर्ट की प्रतियाँ भी जलाईं. दिल्ली के जंतरमंतर पर प्रदर्शन कर रहे लोगों ने ग़ुस्से से कहा कि वे तब तक प्रदर्शन करते रहेंगे जब तक दोषी लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं की जाती. ख़बरें हैं कि अमृतसर में भी इसी तरह के विरोध प्रदर्शन हुए हैं. उल्लेखनीय है कि 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों की जाँच की नानावती आयोग रिपोर्ट और उस पर सरकार की कार्रवाई की रिपोर्ट सोमवार को लोकसभा में रखी गई थी. इसके ख़िलाफ़ संसद के दोनों सदनों में विपक्ष ने हंगामा किया और कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित करनी पड़ी. दगों में अपने परिवारजनों को गँवा चुके लोगों ने नाराज़गी से कहा कि आयोग का यह कहना हास्यास्पद है कि कांग्रेस नेताओं के दंगों में शामिल होने के पुख़्ता सबूत नहीं हैं. उनका कहना है कि दंगों की दर्दनाक याद आज भी उनके ज़हन में ताज़ा है. एसजीपीसी की बैठक शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने भी इस बात पर नाराज़गी जताई है कि सरकार उन लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं कर रही है जिनके नाम आयोग की रिपोर्ट में हैं.
एसजीपीसी के महासचिव सुखदेव सिंह भौर ने कहा है, "सरकार ने जिस तरह से जगदीश टाइटलर पर कार्रवाई करने से इंकार किया है उससे पता चलता है कि कांग्रेस की मानसिकता आज भी वैसी ही है जैसी 21 साल पहली थी." उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम को हस्तक्षेप करना चाहिए. उधर शिरोमणि अकाली दल ने इस मसले पर चर्चा के लिए 13 अगस्त को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की एक बैठक बुलाई है. |
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