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'अल्पसंख्यकों की चिंता बढ़ाने वाली रिपोर्ट' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष तरलोचन सिंह का कहना है कि वे नानावती आयोग की रिपोर्ट से बिल्कुल संतुष्ट नहीं हैं और मानते हैं कि उसका भी वही हश्र होगा जो पहले की रिपोर्टों का हुआ. बीबीसी से हुई बातचीत में उन्होंने कहा कि इस रिपोर्ट में कुछ नहीं है और ये पहले के आयोगों की रिपोर्ट की तरह की सरकारी अभिलेखागार का हिस्सा हो जाएगा. उनका कहना है कि आयोग ने कुछ कांस्टेबल, हेड कांस्टेबल का नाम लिया है, तीन कांग्रेस नेताओं का नाम लिया है और दो उन अधिकारियों का नाम लिया है जो बीस साल पहले सेवानिवृत हो चुके हैं. इस रिपोर्ट पर निराशा व्यक्त करते हुए तरलोचन सिंह ने कहा, "यह रिपोर्ट अल्पसंख्यकों की चिंता को बढ़ाने वाली है क्योंकि यह मुलज़िमों के हक़ में जाती है और सरकार उनको बचाने की कोशिश कर रही है." उन्होंने कहा, "अल्पसंख्यकों के दंगों के मामलों में या तो पुलिस दोषी होती है या फिर वह तमाशबीन होती है और रिपोर्ट उसी पुलिस को लिखनी होती है वो इतनी गड़बड़ होती है कि आगे कोई कार्रवाई की संभावना ही नहीं होती." इस सवाल पर कि गुजरात दंगों की भी जाँच चल रही है और क्या वे उस जाँच से कोई उम्मीद रखते हैं, अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि नानावती आयोग ने यहाँ जो किया है वह तो सबने देखा वो वहाँ क्या करते हैं यह देखना पड़ेगा. |
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