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धार्मिक कलाकृतियाँ वापस लाई जाएंगी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने कहा है कि अमृतसर के स्वर्ण मंदिर से जो क़ीमती कला कृतियाँ ग़ायब हो गई थीं उन्हें वापस लाने के लिए सरकार पूरी कोशिश करेगी. ऐसा समझा जाता है कि ये कला वस्तुएँ 1984 में सेना के अभियान के दौरान ग़ायब हो गई थीं. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 400वें प्रकाश वर्ष के मौक़े पर स्वर्ण मंदिर में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए यह आश्वासन दिया कि सरकार उन वस्तुओं को फिर से मंदिर में लाने के लिए पूरी सहायता देगी. सिख धर्म में इन वस्तुओं का काफ़ी महत्व है. स्वर्ण मंदिर की देखरेख करने वाली शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी एसजीपीसी का मानना है कि ऑपरेशन ब्लूस्टार के दौरान कुछ सैनिक युनिटों ने वे वस्तुएँ वहाँ से हटाईं और सैनिक उन्हें अपने साथ ले गए. हालाँकि एसपीजीसी के इस आरोप का न तो कोई आधिकारिक खंडन हुआ है और न ही पुष्टि हुई है लेकिन सिख समुदाय के लिए यह बहुत अहम मुद्दा बन चुका है. लोग ख़ुश हुए इसीलिए जब प्रधानमंत्री ने बुधवार को इस मुद्दे को छुआ तो स्वर्ण मंदिर परिसर में मौजूद लोग खुशी से उछल पड़े. कुछ का कहना था प्रधानमंत्री चूँकि ख़ुद एक सिख हैं इसलिए सिखों की भावनाओं को भलीभाँति समझ सकते हैं.
प्रधानमंत्री ने यह भी भरोसा दिलाया कि उनकी सरकार पाकिस्तान से अनुरोध करेगी कि सिख श्रद्धालुओं के लिए वीज़ा नियम आसान किए जाएं ताकि वे वहाँ अपने धार्मिक स्थलों पर जा सकें. इस समारोह में बहुत से बड़ी हस्तियाँ हिस्सा ले रही हैं जिनमें पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और तिब्बत के धार्मिक नेता दलाई लामा के नाम प्रमुख हैं. इस अवसर पर लाखों श्रद्धालु स्वर्ण मंदिर को देखने के लिए उमड़े हैं. चार सौ साल पहले सिखों के पाँचवें गुरु, गुरु अर्जन देव ने गुरु ग्रंथ साहब को अमृतसर में हरिमंदिर साहब में स्थापित किया था. इन दिनों उसी अवसर की याद में श्रद्धालु भारत के विभिन्न राज्यों से तो अमृतसर पहुँचे ही है साथ ही अनेक सिख अमरीका, ब्रिटेन, कनाडा और अन्य देशों से भी वहाँ पहुँचे हैं. पंजाब की सड़कों पर श्रद्धालुओं को रोक-रोककर सिख रिवायत के अनुसार 'लंगर' खिलाया जा रहा है. |
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