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मंगलवार, 31 अगस्त, 2004 को 23:33 GMT तक के समाचार
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ख़ालसा त्रिशताब्दी पर किए वादे अब भी पूरे नहीं हुए

स्वर्ण मंदिर
ख़ालसा त्रिशताब्दी के मौके पर नेताओं ने बड़े-बड़े वादे किए थे लेकिन वे पूरे नहीं हुए
गुरु ग्रंथ साहब प्रकाश उत्सव पिछले लगभग पाँच साल में सिखों का दूसरा बड़ा उत्सव है.

इससे पहले वर्ष 1999 में ख़ालसा पंथ की तीसरी शताब्दी पूरी होने पर पंजाब में आनंदपुर साहब में विशाल समारोह हुआ था जिसमें पूरी दुनिया से लगभग 30 लाख लोगों ने भाग लिया था.

वह समारोह सिखों को कोई संदेश या दिशा न दे पाया था. उस समारोह में राज्य सरकार की पूरी भागीदारी थी और राजनीतिक नेताओं ने बड़े-बड़े वादे भी किए थे. लेकिन उन वादों में से अधिकाँश पूरे नहीं हुए.

शिरोमणि अकाली दल के महासचिव कैप्टन कंवलजीत सिंह जो गुरु ग्रंथ साहब प्रकाश उत्सव के आयोजकों में शामिल हैं, कहते हैं कि इस बार ऐसा नहीं होगा और इस सम्मेलन से पूरी मानवता के लिए संदेश निकलेगा. महत्वपूर्ण है कि ख़ालसा त्रिशताब्दी के समारोह के आयोजन की ज़िम्मेदारी भी अन्य नेताओं के साथ-साथ कैप्टन कवलजीत सिंह के कंधों पर थी.

बड़े-बड़े वादे

इस बार शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति गुरु ग्रंथ साहब के 400वें स्थापना दिवास का शिरोमणि अकाली दल की सहायता से आयोजन कर रही है. सरकार आयोजकों में शामिल नहीं है और एसजीपीसी ने तो उसे दखल भी न देने को कहा है.

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ख़ालसा त्रिशताब्दी के मौके पर भी सिखों ने बहुत उत्साह से समारोह में भाग लिया था

ख़ालसा की त्रिशताब्दी के अवसर पर 1999 में तत्कालीन मुख्यमंत्री व शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष प्रकाश सिंह बादल ने बड़े-बड़े वादे किए थे. उस समय बादल ने वादा किया था की आनंदपुर साहिब में 500 करोड़ रूपए की लागत से सूचना तकनीक संस्थान बनाया जाएगा.

सबसे बड़ा वादा आनंदपुर साहिब के नज़दीक एक नया शहर बसाने का था. इस पर अमल करने की कोशिश तो की गई लेकिन आनंदपुर साहिब के पास नहीं बल्कि चंडीगढ़ के नज़दीक. उल्लेखनीय है कि बेअंत सिंह की काँग्रेस सरकार के समय भी ऐसी ही योजना तैयार हुई थी जिसका उस समय अकाली दल ने ही विरोध किया था. लेकिन जब अकाली सरकार ने इस फ़ाइल को खोला तो जनता के विरोध के कारण इस पर अमल नहीं किया जा सका.

राज्य सरकार ने 200 करोड़ रूपए की लागत से चंडीगढ़-आनंदपुर साहिब मार्ग को छह लेन मार्ग बनाना था. इस वादे की तो फ़ाइल ही नहीं खुली. केन्द्र सरकार ने भी आनंदपुर में सेना अकादमी खोलने का वादा किया था.

सिख नेतृत्व और दिशा

अब देखना यह है कि क्या गुरू ग्रंथ साहिब की हरिमंदिर साहब में स्थापना के चौथी शताब्दी के अवसर पर भी इतिहास दोहराया जाता है या नहीं.

स्वर्ण मंदिर
वरिष्ठ अकाली नेता कैप्टन कंवलजीत कहते हैं कि इस उत्सव से पूरी मानवता को संदेश मिलेगा

बुद्धिजीवियों का मानना है कि सिख समुदाय के लिए मुख्य मुद्दा यह नहीं कि सरकार क्या वादा करती है. मुद्दा यह है कि सिख समुदाय का नेतृत्व उसे क्या दिशा प्रदान करता है. आपसी झगड़ों या किसी और अन्य कारणों से त्रिशताब्दी के अवसर पर नेतृत्व कोई दिशा नहीं दे पाया था. हो सकता है की उस नेतृत्व का उतनी समर्थ ही न रहा हो.

त्रिशताब्दी से कुछ समय पूर्व ही सिख समुदाय एक लंबे संकट में से बाहर आया था और यह दुखद था. अब स्थिति पूर्णतः सामान्य है. गुरु ग्रंथ साहब का सिद्धांत दुनिया को जोड़ने का सिद्दांत है. राजनीतिक हितों से ऊपर उठकर सभी दलों के नेता इस समारोह में शामिल हो रहे हैं. देखना यह है कि राजनीतिक, धार्मिक और जातिगत मतभेदों से ऊपर उठकर आम व्यक्ति के लिए इस अवसर पर क्या संदेश निकलता है.

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