| 'गुरु ग्रंथ साहब भारत के आध्यात्मिक ज्ञान का सार' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सिखों के पावन ग्रंथ, गुरु ग्रंथ साहब की हरिमंदिर साहब में स्थापना के 400 साल पूरे होने पर भारत के राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम अमृतसर पहुँचे और उन्होंने हरिमंदिर साहब में माथा टेका. उन्होंने इस मौके पर हरिमंदिर साहब में लगभग बीस मिनट पाठ करने के बाद उन्होंने कहा, "ये ग्रंथ विभिन्न धर्मों के बीच वार्तालाप को बढ़ावा देता है और भारत के आध्यात्मिक ज्ञान का सार है." उनका कहना था कि भारतीयों को गुरु ग्रंथ साहब की सीख का पालन कर राष्ट्र और विश्व में आपसी प्रेम, मानवीयता, बराबरी और भाईचारे से रहना चाहिए. उनका कहना था कि इस समय दुनिया में इस ग्रंथ का विशेष महत्व है. उन्हें स्वर्ण मंदिर परिसर में सम्मान स्वरूप सिरोपा और सोने की कृपाण भेंट किए गए. राष्ट्रपति कलाम ने इस मौके पर एक कविता पढ़ी जो उन्होंने गुरु ग्रंथ साहब के सम्मान में लिखी थी. उनका कहना था, "मै समझ सकता हूँ कि गुरु अरजन देव ने इस ग्रंथ को किस तरह बनाया होगा जिसमें विभिन्न गुरुओं और संतों की वाणी है और राष्ट्रीय अखंडता का प्रतीक है. इस मौके पर पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल भी राष्ट्रपति कलाम के साथ थे. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||