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इस्तीफ़ों की मांग पर संसद में हंगामा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नानावती आयोग की रिपोर्ट और उस पर सरकार की कार्रवाई की रिपोर्ट पेश होने के एक दिन बाद विपक्ष ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और केंद्रीय मंत्री जगदीश टाइटलर के इस्तीफ़े की मांग की है. विपक्ष ने इस मांग को लेकर संसद के दोनों सदनों में जमकर हंगामा किया जिसके कारण लोकसभा की कार्यवाही पूरे दिन के लिए और राज्यसभा की कार्यवाही पहले एक घंटे के लिए फिर पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई. उल्लेखनीय है कि 1984 में इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद देश भर में सिख विरोधी दंगों की जाँच के लिए गठित नानावती आयोग की रिपोर्ट सोमवार को संसद में पेश की गई थी. इस रिपोर्ट के साथ सरकार ने इस पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी पेश की थी. इसमें कांग्रेस नेताओं जगदीश टाइटलर और सज्जन कुमार पर दंगा भड़काने के लिए शक के दायरे में रखा गया है लेकिन सरकार ने दोनों पर कोई भी कार्रवाई करने की संभावना से इंकार कर दिया है. लोकसभा जैसे ही लोकसभा की कार्यवाही शुरु हुई प्रमुख विपक्षी दल भाजपा और अकाली दल के नेता अध्यक्ष की आसंदी के पास आ गए और नानावती आयोग की रिपोर्ट पर चर्चा की माँग शुरु कर दी. वे प्रश्नकाल स्थगित करके इस विषय पर चर्चा की माँग कर रहे थे.
वे अपने हाथों में अख़बारों की प्रतियाँ लिए हुए थे और प्रधानमंत्री तथा जगदीश टाइटलर के इस्तीफ़े की माँग कर रहे थे. इस पर लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने कहा कि वे भी इस विषय को लेकर चिंतित हैं और चाहते हैं कि इस पर चर्चा हो और वे इसके लिए कोई समय तय करने के लिए तैयार हैं. लेकिन विपक्ष इसके लिए राज़ी नहीं हुआ और शोर जारी रहा तब तक सत्ता पक्ष के सदस्य भी इस्तीफ़े की बात पर उत्तेजित हो गए. लोकसभा अध्यक्ष ने इसके बाद लोकसभा की कार्यवाही बुधवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी. राज्यसभा राज्यसभा में विपक्ष की उपनेता सुषमा स्वराज ने कहा कि नानावती आयोग ने 84 के दंगों में सिखों की हत्या के लिए कांग्रेस के नेताओं को दोषी ठहराया है. सदन की कार्यवाही भारत छोड़ो आंदोलन के उल्लेख के साथ शुरु हुई. इसके बाद सुषमा स्वराज ने कहा कि ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस कांग्रेस के लोगों ने आज़ादी के आंदोलन में भाग लिया उसी कांग्रेस के लोंग सिखों की हत्या में भी शामिल थे. इसके बाद विपक्ष ने नानावती आयोग पर चर्चा की मांग की और इसकी अनुमति न मिलने के बाद हंगामा शुरु कर दिया. सत्तापक्ष की ओर से भी सदस्यों ने विपक्ष के हंगामे के जवाब में शोर करना शुरु कर दिया. पहले तो राज्यसभा की कार्यवाही एक घंटे के लिए स्थगित की गई फिर हंगामे के कारण इसे बुधवार की सुबह तक के लिए स्थगित कर दिया गया. |
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