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सरकार रिपोर्ट पर बहस के लिए तैयार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
विपक्षी पार्टियों की कड़ी आलोचना और वामपंथी दलों की माँग के बाद केंद्र सरकार नानावती आयोग की रिपोर्ट पर संसद में बहस के लिए राज़ी हो गई है. 1984 के सिख विरोधी दंगों पर आयोग की रिपोर्ट सोमवार को संसद में पेश की गई थी और इसके साथ ही सरकार ने इस मामले पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी पेश की थी. समाचार एजेंसी पीटीआई ने ख़बर दी है कि संसदीय कार्य मंत्री गुलाम नबी आज़ाद ने लोकसभा में भाजपा के उपनेता विजय कुमार मल्होत्रा को फ़ोन पर बताया है कि बुधवार को संसद में इस मामले पर बहस होगी. विजय कुमार मल्होत्रा ने कहा, "गुलाम नबी आज़ाद ने कहा कि सरकार इस मामले पर बहस के लिए तैयार है, हमने माँग की कि इस मामले पर स्थगन प्रस्ताव लाया जाए जिसके लिए वे राज़ी हो गए." भारी हंगामा मंगलवार को संसद में विपक्षी सदस्यों ने रिपोर्ट में 'दोषी' पाए गए काँग्रेसी नेताओं के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने में सरकार की नाकामी का सवाल उठाते हुए भारी हंगामा किया और माँग की कि संसद के बाक़ी काम रोककर इस मामले पर बहस हो. विपक्षी नेता माँग कर रहे हैं कि सज्जन कुमार और जगदीश टाइटलर जैसे काँग्रेसी नेताओं के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाए. बुधवार को संसद की बैठक शुरू होने से पहले विपक्षी सांसदों की एक बैठक होने वाली है जिसमें सदन में अपनाई जाने वाली रणनीति तय की जाएगी. विपक्षी गठबंधन एनडीए के सूत्रों ने पत्रकारों को बताया है कि पार्टियों ने अपने सांसदों से कहा है कि वे संसद में मौजूद रहें और स्थगन प्रस्ताव के पक्ष में मतदान करें. संसद में स्थगन प्रस्ताव लाने के लिए कई सांसदों ने नोटिस दिए हैं जिनमें विजय कुमार मल्होत्रा, अकाली दल के नेता एसएस ढींढसा और जनता दल यूनाइटेड के प्रभुनाथ सिंह शामिल हैं. |
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