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बुधवार, 10 अगस्त, 2005 को 08:23 GMT तक के समाचार
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जगदीश टाइटलर पर बढ़ता दबाव
जगदीश टाइटलर
टाइटलर को नानावती आयोग ने शक के दायरे में रखा है
वामपंथी दलों की 1984 के दंगों की जाँच के लिए गठित नानावती आयोग की रिपोर्ट की सिफ़ारिशों के मद्देनज़र कार्रवाई करने की माँग के बाद केंद्रीय मंत्री जगदीश टाइटलर पर इस्तीफ़े के लिए दबाव बढ़ गया है.

कांग्रेसी सांसद सज्जन कुमार और दिल्ली के तत्कालीन पुलिस आयुक्त एससी टंडन की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं.

नानावती आयोग की रिपोर्ट में जगदीश टाइटलर के बारे में कहा गया है कि 1984 में सिख विरोधी दंगों में उनकी भूमिका शक के दायरे में है.

आयोग का कहना है कि इस दंगे में वे शामिल भी हो सकते हैं हालांकि सरकार की ओर से कह दिया गया है कि संभावना के आधार पर किसी पर कार्रवाई नहीं हो सकती.

लेकिन ख़ुद जगदीश टाइटलर का कहना है कि 84 के दंगों में उनकी कोई भूमिका नहीं थी और पिछले 21 सालों में नौ आयोग बने और किसी ने उनका नाम नहीं लिया.

दरअसल यूपीए सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे वामपंथी दलों के कार्रवाई करने की माँग के बाद सरकार पर कार्रवाई के लिए दबाव बढ़ गया है.

वामपंथी दलों ने नानावती आयोग की रिपोर्ट की सिफ़ारिशों के मद्देनज़र कार्रवाई करने की माँग की है.

वामपंथी दलों का कहना था कि आयोग को जिन बिंदुओं की जाँच करनी थी उसे भी ठीक तरह से नहीं किया.

उल्लेखनीय है 84 के सिख विरोधी दंगों की जाँच कर रहे नानावती आयोग की रिपोर्ट और इस पर सरकार की कार्रवाई की रिपोर्ट सोमवार को लोकसभा में पेश की गई थी.

इसमें कांग्रेस के दो नेताओं जगदीश टाइटलर व सज्जन कुमार के दंगे में शामिल होने का इशारा किया गया है और दिल्ली के तत्कालीन उपराज्यपाल सहित कई पुलिस अधिकारियों को दोषी ठहराया है.

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) का कहना है कि आयोग ने जिनके ख़िलाफ़ कार्रवाई करने को कहा है उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई करनी चाहिए ओर जिनकी ओर इशारा किया है उनके ख़िलाफ़ जाँच की जानी चाहिए.

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) का कहना है कि जिनके ख़िलाफ़ भी आयोग ने प्रामाणिक सबूत होने की बात कही है,उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई शुरु करनी चाहिए.

सीपीआई ने आयोग की रिपोर्ट को विरोधाभासी बताते हुए कहा है कि इसमें कांग्रेस के नेताओं को दोषी भी ठहराया गया है और उनके नाम भी नहीं दिए गए हैं.

सीपीआई ने कहा है कि सरकार को पुलिस विभाग को पुनर्गठित करना चाहिए जिससे कि उसकी विश्वसनीयता क़ायम हो सके.

उधर सीपीएम ने सरकार की कार्रवाई रिपोर्ट पर असंतोष ज़ाहिर करते हुए कहा है कि आयोग ने जो सीमित सिफ़ारिशें की हैं,सरकार ने उस पर भी गंभीरता से कार्रवाई नहीं की है.

नानावती आयोग की रिपोर्ट और सरकार की कार्रवाई रिपोर्ट को लेकर विपक्ष ने उसे पहले ही घेर रखा है.

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