|
सज्जन कुमार का ग्रामीण बोर्ड से इस्तीफ़ा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
काँग्रेसी सांसद सज्जन कुमार ने दिल्ली ग्रामीण विकास बोर्ड के अध्यक्ष पद से गुरुवार को इस्तीफ़ा दे दिया है. 1984 के सिख विरोधी दंगों की जाँच करनेवाले नानावती आयोग ने सज्जन कुमार के दंगे में शामिल होने की ओर इशारा किया है. सज्जन कुमार बाहरी दिल्ली से सांसद हैं और उन्होंने दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित से मुलाक़ात कर उन्हें अपना इस्तीफ़ा सौंपा. दिल्ली ग्रामीण विकास बोर्ड का गठन पिछले साल किया गया था और इसका बजट 100 करोड़ रुपए है. नानावती आयोग ने सज्जन कुमार के ख़िलाफ़ बंद किए गए छह मामलों की दोबारा जाँच के आदेश दिए हैं. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने लोक सभा में वादा किया था कि जिन मामलों की जाँच के लिए आयोग ने कहा है, उस दिशा में सरकार क़दम उठाएगी. इसके पहले केंद्रीय मंत्री जगदीश टाइटलर ने नानावती आयोग की रिपोर्ट में उनका नाम शामिल होने पर उठे विवाद के बाद मंत्रिपद से इस्तीफ़ा दे दिया था. उन्होंने बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को अपना इस्तीफ़ा सौंपा और उसकी एक प्रति प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भी भेज दी. बाद में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सिफ़ारिश पर राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने उनका इस्तीफ़ा स्वीकार कर लिया. जगदीश टाइटलर ने नानावती रिपोर्ट में अपने नाम को लेकर हुए विवाद पर नाराज़गी जताते हुए कहा कि आयोग ने उनके दोषी होने का संदेह मात्र ज़ाहिर किया है और उसी शक के आधार पर जब प्रधानमंत्री जाँच कराना चाहते हों तो उनके लिए मंत्री बने रहना संभव नहीं था. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||