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कार्रवाई रिपोर्ट में बदलाव करेगी सरकार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के केंद्रीय क़ानून मंत्री हंसराज भारद्वाज ने कहा है कि 1984 के सिख दंगों पर नानावती आयोग की सिफ़ारिशों के बाद सरकार की कार्रवाई रिपोर्ट में बदलाव किया जाएगा. हंसराज भारद्वाज ने बीबीसी से बातचीत करते हुए कहा,"बहस पूरी होने के बाद हम सारे दस्तावेज़ मंगवाएँगे, उसकी एक-एक लाईन पढ़ेंगे और कार्रवाई रिपोर्ट को बदलने के बाद बताएँगे". ये पूछे जाने पर कि क्या ये प्रकरण केंद्रीय मंत्री जगदीश टाइटलर के इस्तीफ़े से ही समाप्त हो जाएगा, भारद्वाज ने कहा कि ये प्रकरण आगे बढ़ेगा. उन्होंने कहा,"ये प्रकरण आगे बिल्कुल बढ़ेगा और प्रधानमंत्री ने जो आश्वासन दिया है उसे पूरा किया जाएगा". इससे पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बुधवार को लोकसभा में आश्वासन दिया था कि 84 के सिख विरोधी दंगों के मामले में नानावती आयोग ने जिन लोगों के भी ख़िलाफ़ सुबूत होने की बात कही है उनके ख़िलाफ़ सरकार हर संभव क़ानूनी क़दम उठाएगी. हंसराज भारद्वाज ने प्रधानमंत्री के आश्वासन पर कहा,"चाहे कोई भी व्यक्ति हो, कितना भी बड़ा हो, हम अपने मंत्रालय में उसपर विचार करेंगे और उसपर पूरी कार्रवाई करेंगे". त्यागपत्र स्वीकार
इससे पहले बुधवार को आप्रवासी मामलों के केंद्रीय मंत्री जगदीश टाइटलर ने नानावती आयोग की रिपोर्ट में उनका नाम शामिल होने पर उठे विवाद के बाद मंत्रिपद से इस्तीफ़ा दे दिया. उन्होंने बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को अपना इस्तीफ़ा सौंपा और उसकी एक प्रति प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भी भेज दी. बाद में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सिफ़ारिश पर राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम ने उनका इस्तीफ़ा स्वीकार कर लिया. जगदीश टाइटलर ने नानावती रिपोर्ट में अपने नाम को लेकर हुए विवाद पर नाराज़गी जताई. उन्होंने कहा,"आयोग ने मेरे दोषी होने का संदेह मात्र ज़ाहिर किया है और उसी शक के आधार पर जब प्रधानमंत्री जाँच कराना चाहते हों तो उनके लिए मंत्री बने रहना संभव नहीं था. बीबीसी हिंदी सेवा से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि जाँच कराई जाए ताकि वे अपने को निर्दोष साबित कर सकें. नानावती आयोग की रिपोर्ट में जगदीश टाइटलर के बारे में कहा गया है कि 1984 में सिख विरोधी दंगों में उनकी भूमिका शक के दायरे में है. रिपोर्ट आने के बाद विपक्षी दलों ने तो जमकर हंगामा किया ही, सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे वामपंथी दलों ने भी सरकार पर आयोग की सिफ़ारिशों के आधार पर कार्रवाई करने के लिए दबाव बनाया था. |
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