पाक में ईश-निंदा क़ानून में बदलाव की मांग

सलमान तासीर की बरसी

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इमेज कैप्शन, ईश-निंदा क़ानून में बदलाव की मांग बहुत जगहों से हो रही है.
    • Author, हफ़ीज़ चाचड़
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी संवाददाता, इस्लामाबाद

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के पूर्व गवर्नर सलमान तासीर की हत्या की पहली बरसी के अवसर पर मानवाधिकार के लिए काम करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था 'ऐम्नेस्टी इंटरनेशनल' ने पाकिस्तानी सरकार से विवादास्पद ईश-निंदा क़ानून में संशोधन करने की माँग की है.

सलमान तासीर को पिछले साल चार जनरवी को इस्लामाबाद में उनके सुरक्षागार्ड ने गोली मार दी थी. तासीर ने एक ईसाई महिला आसिया बीबी को ईश-निंदा के आरोप में अदालत की ओर से मौत की सज़ा सुनाए जाने का कड़ा विरोध किया था.

ऐम्नेस्टी इंटरनेशनल के एक वरिष्ठ पदाधिकारी साम ज़रीफ़ ने एक बयान जारी कर कहा कि सलमान तासीर को एक निर्दोष महिला का समर्थन करने पर क़त्ल किया गया.

उन्होंने कहा कि सलमान तासीर की हत्या के मुक़दमे का फ़ैसला सुनाने वाले जज का अभी तक कुछ पता नहीं है और इससे यह साबित होता है कि ईश-निंदा क़ानून के कारण पाकिस्तान में न्याय व्यवस्था सही तौर पर काम नहीं कर रही है.

ग़ौरतलब है कि सलमान तासीर के सुरक्षागार्ड मुमताज़ क़ादरी ने अपना जुर्म स्वीकार करते हुए कहा था कि उन्होंने सलमान तासीर को ईश-निंदा क़ानून के ख़िलाफ़ बयान देने के कारण मार दिया था.

रावलपिंडी की आतंकवाद निरोधक अदालत ने मुमताज़ क़ादरी को अक्तूबर 2011 में मौत की सज़ा सुनाई थी और सज़ा सुनाने के तुरंत बाद जज ग़ायब हो गए थे.

सुधार

साम ज़रीफ़ ने अपने बयान में कहा कि पाकिस्तानी की इस्लामी वैचारिक परिषद ने वर्ष 2010 में ईश-निंदा क़ानून में सुधार करने की सिफ़ारिश की थी.

उन्होंने आगे कहा कि सरकार ने 2009 और 2010 में वादा किया था कि ईश-निंदा क़ानून की समीक्षा और उसमें सुधार किया जाएगा लेकिन सलमान तासीर और शहबाज़ भट्टी की हत्या के बाद सरकार ख़ामोश हो गई.

ग़ौरतलब है कि सलमान तासीर की हत्या के एक महीने बाद कुछ अज्ञात लोगों ने इस्लामाबाद में अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय मंत्री शहबाज़ भट्टी पर हमला किया था, जिसमें वे मारे गए थे.

शहबाज़ भट्टी का संबंध ईसाई समुदाय से था और वे भी ईश-निंदा क़ानून में संशोधन के पक्ष में थे, जिसके लिए आवाज़ भी उठाते रहते थे.

ऐम्नेस्टी इंटरनेशनल के पदाधिकारी के मुताबिक़ पाकिस्तान में ईश-निंदा क़ानून की मौजूदगी में कोई भी व्यक्ति किसी की भी हत्या कर उसे धार्मिक रंग दे सकता है और यह एक ख़तरनाक बात है.

दूसरी ओर सलमान तासीर की याद में कुछ लागों ने लाहौर और इस्लामाबाद में शमा रोशन की और उनको श्रद्धांजलि दी, लेकिन यह सब कुछ डर के माहौल में हुआ.