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जी 20 के लिए सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम
जी 20 की सुरक्षा
सम्मेलन के लिए सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतज़ाम किए गए हैं
दुनिया भर के नेता लंदन में जमा हो रहे हैं जिसमें वो 1930 के बाद दुनिया के सबसे बड़े वित्तीय संकट का हल निकालने पर चर्चा करेंगे.

जी-20 सम्मेलन को लेकर सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतज़ाम किए गए हैं. इसके विरोध में प्रदर्शन की भी आशंका व्यक्त की जा रही है.

ये सम्मेलन गुरुवार से शुरु होने जा रहा है.

इधर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए नेताओं का लंदन पहुँचना शुरु हो गया है.

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा लंदन पहुँच गए हैं. राष्ट्रपति पद संभालने के बाद उनकी ये पहली यूरोप यात्रा है.

वो बुधवार को ब्रिटेन के प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन से मुलाक़ात करेंगे.

भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी लंदन पहुँच गए हैं और बुधवार को वो भी ब्रिटेन के प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन से मिलेंगे.

उम्मीद की जा रही है कि सम्मेलन में वित्तीय संकट से निबटने के लिए कोई ठोस नीति पर सहमति हो सकेगी.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि सम्मेलन में कोई सहमति हो सकेगी, ये कहना मुश्किल है क्योंकि संकट से निबटने के तरीकों पर यूरोपीय और अमरीकी नेताओं में मतभेद है.

मतभेद

अमरीका विकास को बढ़ाने के लिए और ज़्यादा ख़र्च करने पर ज़ोर दे रहा है जबकि कुछ यूरोपीय देश वित्त बाज़ार को चलाने वाले नियमों के बदलाव पर ज़ोर दे रहे हैं.

 लंदन में नेताओं को मिलकर वैश्विक अर्थव्यवस्था में भरोसे रूपी ऑक्सीज़न भरनी होगी और लोगों को भविष्य के लिए उम्मीद की किरण दिखानी होगी
गॉर्डन ब्राउन

गॉर्डन ब्राउन का कहना है," लंदन में नेताओं को मिलकर वैश्विक अर्थव्यवस्था में भरोसे रूपी ऑक्सीज़न भरनी होगी और लोगों को भविष्य के लिए उम्मीद की किरण दिखानी होगी."

यूरोपीय देश चाहते हैं कि इस साल और अगले साल किसी भी बड़े खर्च की घोषणा न की जाए.

फ़्रांस ने धमकी दी है कि अगर कड़े वित्तीय नियमों की उसकी माँग नहीं मानी जाती तो वो जी 20 सम्मेलन में हिस्सा नहीं लेगा.

फ़्रांस के वित्त मंत्री ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि राष्ट्रपति सार्कोज़ी ऐसे किसी समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे जिसमें उन्हें ये लगता कि इसे लागू नहीं किया जा सकता.

फ़्रांस की माँग है कि वैश्विक वित्तीय नियामक होना चाहिए जबकि अमरीका और ब्रिटेन इसका विरोध कर रहे हैं.

उल्लेखनीय है कि जी 20 में दुनिया की बड़े औद्योगिक और विकासशील देश शामिल हैं जो विश्व की 85 प्रतिशत अर्थव्यवस्था पर नियंत्रण करते हैं.

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