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जी-20 प्रदर्शनकारियों से बाइडन की अपील | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका के उपराष्ट्रपति जोसेफ़ बाइडन ने जी-20 के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे लोगों से अपील की है वो सरकारों को आर्थिक संकट को सुलझाने का मौका दें. जी-20 के सम्मेलन से पहले चिली में हो रही तैयारी बैठक में बाइडन ने कहा कि अगले हफ्ते लंदन में हो रहे सम्मेलन में दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्ष आर्थिक संकट को सुलझाने के लिए पेश किए गए प्रस्तावों को मान लेंगे. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने बाइडन के बयान का समर्थन किया. जी-20 सम्मेलन गुरुवार से लंदन में शुरु हो रहा है. विडाल डेल मेर में एक संवाददाता सम्मेलन में बाइडन ने कहा, '' मैं उम्मीद करता हूं कि प्रदर्शनकारी हमें एक मौका देंगे और यह सुनेंगे कि हम आर्थिक संकट को कैसे सुलझाएंगे. हमें लगता है कि हम उन्हें स्पष्ट बता पाएंगे कि जी 20 में हम ठोस प्रस्ताव रखने जा रहे हैं.'' जी-20 सम्मेलन से पहले सुरक्षा के व्यापक इंतज़ाम किए जा रहे हैं जहां दुनिया भर के नेता वैश्विक आर्थिक संकट से निपटने के उपायों पर विचार विमर्श करेंगे.
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री का कहना था, '' लंदन में जो हो रहा है उससे हम वाकिफ़ हैं. मैं इस बात को समझता हूं और जी-20 में हम ऐसे उपायों पर सहमत होंगे जिससे नौकरियां बढ़ेंगी, व्यवसाय बढ़ेगा और अर्थव्यवस्था आगे बढ़ेगी.'' लंदन मे शनिवार से ही प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ जमा हो रही है और ये ग़रीबी, बेरोज़गारी और जलवायु परिवर्तन के मुद्दों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. पुलिस के अनुमान के अनुसार क़रीब 35 हज़ार लोग प्रदर्शन में हिस्सा लेने वाले हैं. बुधवार और गुरुवार को लंदन में की रैलियों का आयोजन हो रहा है और अलग अलग संगठन विभिन्न मुद्दों पर रैलियों का आयोजन कर रहे हैं. इसी बीच जर्मनी की चांसल एंगेला मर्कल ने एक इंटरव्यू में यह कहकर सबको चौंकाया कि जी 20 में कोई बहुत महत्वपूर्ण समझौता हो पाना मुश्किल है. उनका कहना था कि इतने बड़े आर्थिक संकट को सुलझाने और वैश्विक बाज़ार का नया ढ़ांचा तैयार करने के लिए एक बैठक काफ़ी नहीं है. बर्लिन में आयोजित एक रैली में लोगों ने जी 20 के नेताओं के लिए लिखे बैनर में कहा, '' आपके संकटों का ख़ामियाज़ा हम नहीं भुगतेंगे.'' जर्मनी में कुछ और स्थानों पर प्रदर्शन भी हुए हैं जिसमें शामिल होने वाले लोगों का मानना था कि जर्मन सरकार वित्तीय संस्थानों को अरबों डॉलर का पैकेज दे रही है जबकि आम कामगारों को राहत देने में ढिलाई बरत रही है. | इससे जुड़ी ख़बरें जी-20 से पहले लंदन में विरोध प्रदर्शन28 मार्च, 2009 | पहला पन्ना 'भारत में मंदी से ज़्यादा आशंका हावी'16 नवंबर, 2008 | कारोबार 'मंदी से निपटने के लिए हर संभव प्रयास'14 मार्च, 2009 | कारोबार 'बेरोज़गारी रोकने को भी प्राथमिकता दें'25 मार्च, 2009 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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