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बर्मा के सहायता प्रयासों का समर्थन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन और फ्रांस ने बर्मा के तूफ़ान पीड़ितों को दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों के संगठन आसियान के सहायता प्रयासों के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया है. सोमवार को सिंगापुर में हुई आपात बैठक में बर्मा अंतरराष्ट्रीय मदद स्वीकार करने पर सहमत हो गया. लेकिन उसने आसियान देशों को ये बता दिया है कि वह चाहेगा कि मदद पश्चिमी एजेंसियों के माध्यम से नहीं बल्कि एशियाई देशों के ज़रिए दी जाए. संवाददाताओं का कहना है कि ऐसा लगता है कि बर्मा के सैन्य शासन को ये बात समझ में आने लगी है कि अंतरराष्ट्रीय मदद की ज़रूरत है लेकिन वह पश्चिमी राहत एजेंसियों के कार्यकर्ताओं को देश में बड़े पैमाने पर प्रवेश देने से अब भी डरता है. इसके पहले बर्मा ने तूफ़ान नर्गिस की चपेट में आकर मारे गए लोगों की स्मृति में तीन दिन के शोक की घोषणा की थी. इस दौरान बर्मा का राष्ट्रीय झंडा आधा झुका रहेगा. सरकारी टीवी चैनल घोषणा की गई, " तूफ़ान नर्गिस में बहुत सारे लोग मारे गए हैं, इसलिए 20 मई से लेकर 22 मई तक तीन दिन के शोक की घोषणा की जाती है." इस क़दम से लगता है कि शायद सैन्य शासन त्रासदी को स्वीकार करने लगा है और अब वह बाहरी मदद स्वीकार करने में ज़्यादा नरमी दिखा सकता है. बर्मा सरकार की इस बात के लिए कड़ी आलोचना हुई है कि उसने दो मई को आए भीषण तूफ़ान के बाद राहत कार्यों में तेज़ी नहीं दिखाई. तूफ़ान के कारण करीब 78 हज़ार लोगों की मौत हो चुकी है और 55 हज़ार लोग लापता हैं. |
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