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बर्मा में मरने वालों की संख्या 78 हज़ार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बर्मा में समुद्री तूफ़ान में मरने वालों की संख्या बढ़कर 78 हज़ार हो गई है. सरकारी आँकड़ों के मुताबिक़ क़रीब 56 हज़ार लोग लापता हैं. इससे पहले सरकार ने मरने वालों की संख्या 43 हज़ार बताई थी. हालाँकि रेड क्रॉस और संयुक्त राष्ट्र को आशंका है कि तूफ़ान में एक लाख से भी ज़्यादा लोग मारे गए हैं. दूसरी ओर तूफ़ान प्रभावित इलाक़ों में राहत कार्य की धीमी गति से सहायता एजेंसियाँ नाराज़ हैं. दो और तीन मई को समुद्री तूफ़ान नर्गिस ने बर्मा के दक्षिणी इलाक़े में तबाही मचा दी थी. तूफ़ान के इतने दिनों बाद भी राहत कार्य में काफ़ी बाधा आ रही है क्योंकि कई इलाक़ों में लगातार बारिश भी हो रही है. दूसरी ओर विदेशी राहत एजेंसियों को लेकर बर्मा सरकार के कड़े रुख़ के कारण भी राहत कार्य पर असर पड़ रहा है. संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार संयोजक जॉन होम्स रविवार को रंगून पहुँचने वाले हैं. वे बर्मा सरकार को इस बात के लिए मनाने की कोशिश करेंगे कि वह संयुक्त राष्ट्र के राहत कर्मियों को प्रभावित इलाक़ों में जाने से ना रोके. राहत कार्य हाल ही में बर्मा सरकार ने यूरोपीय संघ के शीर्ष सहायता अधिकारी लुईस मिखेल को तूफ़ान से प्रभावित डेल्टा क्षेत्र में जाने से रोक दिया था. उन्हें ये भी नहीं बताया गया कि बर्मा सरकार ऐसा क्यों कर रही है. हालाँकि अब बर्मा सरकार ने वादा किया है कि वह इस सप्ताहंत विदेशी राजनयिकों को तूफ़ान से प्रभावित डेल्टा क्षेत्र के दौरे पर ले जाएगी. कई राहतकर्मी वीज़ा का इंतज़ार कर रहे हैं और जिन्हें अनुमति मिली भी है वो रंगून से बाहर नहीं जा पा रहे हैं. बैंकॉक से बीबीसी संवाददाता क्रिस हॉग का कहना है कि मरने वालों की संख्या का सही आकलन करने में इसलिए भी मुश्किल आ रही है क्योंकि प्रभावित लोगों की ज़रूरतों के बारे में जानने के लिए सरकार के पास संसाधनों की कमी है. उनका कहना है कि सूचनाओं के अभाव के कारण इसमें भी मुश्किल आ रही है कैसे प्रभावित लोगों की मदद की जाए. तूफ़ान में बच गए लोगों के लिए पीने के पानी और खाद्यान्न सामग्रियों की भी कमी है. |
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