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बर्मा को राज़ी करने की कोशिश | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून का कहना है कि वो संयुक्त राष्ट्र मानवीय सहायता के प्रमुख जॉन होम्स को बर्मा भेज रहे हैं ताकि बर्मा को तूफ़ान पीड़ितों के लिए अंतरराष्ट्रीय सहायता स्वीकार करने के लिए राज़ी किया जा सके. संयुक्त राष्ट्र के महासचिव जापान और भारत सहित प्रमुख एशियाई देशों के प्रतिनिधियों और सुरक्षा परिषद के पांचों स्थायी सदस्यों के साथ गुरुवार को विचार विमर्श करेंगे कि इस मानवीय संकट को दूर करने के लिए क्या किया जाए. जॉन होम्स का ख़्याल है कि बर्मा पर पड़ोसियों की बात का ज़्यादा असर पड़ेगा. उनका कहना था,'' मैं समझता हूं कि बर्मा के पड़ोसी देशों और आसियान के सदस्य देशों की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है. हम कई तरह से कई स्तर पर इन देशों के संपर्क में हैं जिससे उन्हें बर्मा में अपने संपर्कों और अपने प्रभाव का इस्तेमाल करने को प्रोत्साहित कर सकें. बर्मा को अपने दरवाज़े खोलना बहुत ज़रूरी है.'' दूसरी ओर जॉन होम्स खाद्य सहायतों से लदे एक विमान के साथ बर्मा जाएँगे. संयुक्त राष्ट्र का अनुमान था कि तीन मई को आए इस विनाशकारी तूफ़ान से 12 से 19 लाख तक लोग प्रभावित हुए हैं, लेकिन अब उसका कहना है कि स्थिति इससे कहीं अधिक गंभीर है. संयुक्त राष्ट्र के मानवीय सहायता के प्रमुख जॉन होम्स ने बताया है कि हालांकि अब संयुक्त राष्ट्र के 100 से ज़्यादा सहायता कर्मी बर्मा में मौजूद हैं. लेकिन उन्हें बुरी तरह से प्रभावित ऐरावाडी डेल्टा में नहीं जाने दिया जा रहा है. बर्मा की सरकार अन्तरराष्ट्रीय मदद तो वहां जाने दे रही है लेकिन संयुक्त राष्ट्र के कर्मचारियों को नहीं. इस बीच यूरोपीय संघ के एक आयुक्त लुई मिशैल बर्मा का दौरा कर रहे हैं जिससे बर्मा की सैनिक सरकार को और विदेशी सहायता स्वीकार करने पर राज़ी कर सकें. मदद की ज़रूरत राहत कार्यों में लगे विभिन्न संगठनों का अनुमान है कि सबसे अधिक प्रभावित इलाक़ों में कोई 20 लाख लोगों को मदद चाहिए. थाईलैंड के हवाई अड्डे से एक अमरीकी विमान सहायता सामग्री लेकर पहुंचा है. अमरीकी सहायता एजेंसी की लॉरा चैपमैन कहती हैं,'' हम पानी के कंटेनर, पानी के जग, 20 हज़ार स्वास्थ्य किट लाए हैं जो दो सप्ताह के लिए एक परिवार की ज़रूरतें पूरी कर सकते हैं. इसके अलावा रोज़मर्रा की चीज़ें जैसे साबुन, टूथब्रश, टूथपेस्ट आदि भी लाए हैं.'' इस तूफ़ान से जो लोग बच गए हैं उनके सामने और बहुत सी चुनौतियां हैं और महामारी का ख़तरा उनके सिर पर मंडरा रहा है. संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के प्रमुख जॉन होम्स कहते हैं कि इससे और बहुत से लोग मर सकते हैं. वो कहते हैं,'' मैंने विशेषज्ञों से इस बारे में बात की है और उनका मानना है कि इस तरह की प्राकृतिक विपदा के दस या बारह दिन बाद अगर सफ़ाई का प्रबंध न हो पाए और लोगों को अस्वास्थ्यकर परिस्थितियों में रहना पड़े और उन्हे साफ़ पानी, खाना और रहने का स्थान न मिले, तो बीमारियां बड़ी तेज़ी से फैलती हैं. और अगर हैज़ा जैसी बीमारी फैल जाए तो भारी संख्या में लोग मरने लगते हैं.'' पूरी अंतरराष्ट्रीय बिरादरी बर्मा की सैनिक सरकार को समझाने की कोशिश कर रही है कि बर्मा के लोगों को मदद चाहिए और जल्दी चाहिए. लेकिन उसे ऐसा लगता है कि एक बार दरवाज़ा खोलने से कहीं सत्ता से नियन्त्रण उसके हाथों से न निकल जाए. |
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