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'बर्मा ने संयुक्त राष्ट्र राहत सामग्री ज़ब्त की' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र की संस्था विश्व खाद्य कार्यक्रम ने कहा है कि उसने फिलहाल बर्मा को सहायता सामग्री भेजना रोक दिया है क्योंकि पहली खेप को बर्मा पहुँचने पर वहाँ की सरकार ने ज़ब्त कर लिया है. विश्व खाद्य कार्यक्रम ने शुक्रवार को कहा कि बर्मा की सैनिक सरकार ने उस टनों राहत सामग्री को ज़ब्त कर लिया है जो तूफ़ान से प्रभावित लोगों के लिए भेजी गई थी. संगठन ने कहा है कि बर्मा सरकार के इस क़दम के बाद उनके पास तब तक सहायता सामग्री रोकने के सिवाय कोई रास्ता नहीं बचा है जब तक कि इस विवाद को हल नहीं कर लिया जाता है. उधर बर्मा सरकार के एक प्रवक्ता ये हुतूत ने समाचार एजेंसी एपी से कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने "निराधार आरोप" लगाए हैं. प्रवक्ता ने कहा कि बर्मा सरकार ने राहत सामग्री को अपने नियंत्रण में इसलिए लिया है ताकि इसे बिना किसी देरी के उसके अपने राहतकर्मी प्रभावित लोगों तक पहुँचा सकें. बर्मा की सैनिक सरकार की इस तूफ़ान से पैदा हुए संकट से निपटने के लिए उठाए गए क़दमों और रवैये के लिए अंतरराष्ट्रीय आलोचना का सामना कर रही है.
ग़ौरतलब है कि बर्मा में गत शनिवार को आए भीषण तूफ़ान में लगभग 23 हज़ार लोग मारे जा चुके हैं, हालाँकि ग़ैरसरकारी संगठनों ने आशंका जताई है कि मृतकों की संख्या एक लाख के आसपास हो सकती है. जो लोग जीवित बचें हैं उनमें से लाखों के पास खाना-पानी नहीं है और वे खुले में रहने के लिए मजबूर हैं. अंतरराष्ट्रीय सहायता एजेंसियों के जो लोग प्रभावित इलाक़ों में पहुँचे हैं उनका कहना है कि सात टन राहत सामग्री बाँटी जा चुकी है लेकिन कुल प्रभावित लोगों में से सिर्फ़ दस प्रतिशत तक ही यह सामग्री पहुँच सकी है. इसके बावजूद बर्मा के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को एक वक्तव्य जारी करके कहा कि वह विदेशी राहतकर्मियों को अपने देश में दाख़िल होने की इजाज़त नहीं देगी. बर्मा सरकार ने कहा है कि वह अंतरराष्ट्रीय सहायता का स्वागत करती है लेकिन उसने ज़ोर देकर कहा कि राहत सामग्री का वितरण उसके ही नियंत्रण में होगा. इससे पहले बर्मा सरकार ने स्पष्ट किया थी कि वह तूफ़ान पीड़ितों के लिए अंतरराष्ट्रीय सहायता चाहता है लेकिन वो किसी भी सूरत में विदेशी सहायताकर्मियों को स्वीकार नहीं करेगा. 'अपने ही लोगों की हत्या' विश्व खाद्य कार्यक्रम के प्रवक्ता पॉल रिज़ले ने कहा है कि संस्था के दो विमान बेहद ज़रूरी खाद्य सामग्री लेकर बर्मा पहुँचे थे जिनमें 38 टन उच्च ऊर्जा वाले बिस्कुट भी थे लेकिन वहाँ पहुँचने पर बर्मा सरकार ने राहत सामग्री अपने क़ब्ज़े में ले ली.
पॉल रिज़ले का कहना था, "यह घटनाक्रम हमारे लिए बहुत ही परेशान करने वाला है. हम यह सोचकर बहुत चिंतित हैं कि यह खाद्य सामग्री तूफ़ान आने के छह दिन बाद भी प्रभावित लोगों तक नहीं पहुँच रही है जिन्हें इस सामग्री का बेसब्री से इंतज़ार है." पॉल रिज़ले ने कहा, "हमने समाज कल्याण मंत्री से अपील की है कि वे तुरंत इस राहत सामग्री को छोड़ दें ताकि इसे बर्मा के दक्षिणी इलाक़ों में भेजा जा सके जहाँ तूफ़ान से प्रभावित लोग इसका इंतज़ार कर रहे हैं." पॉल रिज़ले ने बीबीसी को बताया, "सामान से भरे तीन विमानों के शनिवार को भी बर्मा पहुँचने का कार्यक्रम था लेकिन ये विमान तब तक नहीं जाएंगे जब तक कि ज़ब्त की गई सामग्री विश्व खाद्य सामग्री के कर्मचारियों को नहीं सौंप दी जाती है ताकि इसे बाँटा जा सके." हालाँकि रिज़ले ने कहा कि अलबत्ता विमानों की उड़ान स्थगित कर दी गई है लेकिन सामान की पैकिंग और अन्य तैयारियाँ जारी हैं. बर्मा सरकार के साथ इस बाबत बाचती भी की जा रही है. पड़ोसी देश थाईलैंड में मौजूद बीबीसी संवाददाता जोनाथन हैड का कहना है कि पहले से ही बर्मा में बहुत थोड़ी सहायता पहुँच पा रही है और अब राहत सामग्री ज़ब्त कर लिए जाने के बाद सहायता प्रयासों को बड़ा झटका लगा है. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ऐसा लगता है कि बर्मा के सैनिक शासक अपने घमंड और विदेशियों के लिए संदेह के मिज़ाज को अपने ही लोगों के जीवन से ऊपर रखे हुए हैं. |
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