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मंगलवार, 06 मई, 2008 को 14:36 GMT तक के समाचार
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बर्मा में मृतक 22 हज़ार, हज़ारों लापता
बर्मा में तूफ़ान से तबाही
बर्मा में आए तूफ़ान से जहाँ मृतकों की संख्या 22 हज़ार तक पहुँची, वहीं 41 हज़ार अन्य लापता है

बर्मा के सरकारी मीडिया के अनुसार शनिवार को आए तूफ़ान में 22 हज़ार लोग मारे गए हैं और 41 हज़ार अन्य लापता हैं. उधर रंगून में संयुक्त राष्ट्र के राहतकार्य संयोजक ने आरोप लगाया है कि सरकार कुछ प्रभावित इलाक़ो में राहतकर्मियों को जाने देने से हिचकिचा रही है.

रंगून में संयुक्त राष्ट्र के राहत कार्यों के संयोजक क्रिस केय का कहना है कि बर्मा की सरकार कुछ प्रभावित इलाक़ों में राहत अधिकारियों को जाने की इजाज़त देने से हिचकिचा रही है लेकिन ये भरोसा दिला रही है कि अगले कुछ दिन में स्थिति में बदलाव आएगा.

पड़ोस में थाइलैंड में स्थित कुछ संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों का कहना है कि आपात स्थिति में मदद पहुँचाने के लिए कुछ कर्मचारी अब भी वीज़ा मिलने का इंतज़ार कर रहे हैं.

पर्यवेक्षकों का कहना है कि बर्मा की सरकार विदेशी राहतकर्मियों पर शक कर रहे हैं और नहीं चाहते की बड़ी संख्या में ऐसे कर्मचारी शनिवार को उस समय देश में मौजूद हों जब देश के नए संविधान पर जनमत संग्रह होना है.

बर्मा
विदेशी राहत संस्थाओं को कुछ प्रभावित इलाक़ों में पहुँचने की इजाज़त नहीं मिली है

बर्मा की सरकार ने कुछ प्रभावित क्षेत्रों में जनमत संग्रह को स्थगित कर दिया है लेकिन अन्य जगहों पर ये जारी रहेगा.

हज़ारों लापता, कई बेघर

बर्मा में शनिवार को आए तूफ़ान में मारे गए लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है और अब 22 हज़ार तक जा पहुँची है.

लगभग 41 हज़ार लोग अब भी लापता हैं. सैन्य सरकार में एक मंत्री मौंग मौंग स्वे का कहना है कि बोगाले शहर में 95 प्रतिशत घर तबाह हो गए हैं.

वहाँ समुद्री लहरें लगभग साढ़े तीन मीटर तक जा पहुँचीं और मौंग मौंग स्वे के अनुसार शहर के लगभग सभी एक लाख 95 हज़ार निवासी बेघर हो गए हैं.

धान के खेत तबाह

राहत शिविर
हज़ारों लोग बेघर हो गए है लेकिन कुछ को ही राहत शिविरों में आश्रय मिला है

एक विदेशी राहत संस्था वर्ल्ड विज़न ने बर्मा में भयावह नज़ारा बयान करते हुए बताया है कि धान के खेत तबाह हो गए हैं और चारों ओर लाशें बिखरी पड़ी हैं.

सैकड़ों लोग जो तूफ़ान के चपेट में आने से बच गए हैं वे खाने और घर के लिए मारे मारे घूम रहे हैं.

राहत संस्थाओं ने एक बड़ा और व्यापक राहत अभियान शुरु कर दिया है.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून कह चुके हैं कि संयुक्त राष्ट्र हर संभव मानवीय सहायता मुहैया कराने की कोशिश करेंगा.

अमरीका, यूरोपीय संघ और जापान ने आपात सहायता देने की पेशकश की है.
बर्मा में अधिकारी अब भी नुक़सान का अनुमान लगा रहे हैं और हताहतों की संख्या और बढ़ सकती है.

उधर भारत ने राहत सामग्री के दो जहाज़ भेजने का फ़ैसला किया है जिसमें खाना, टेंट, कंबल, कपड़े और दवाइयाँ होंगी.

नाइजरकितनी सक्षम हैं सरकारें?
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