BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
बुधवार, 07 मई, 2008 को 14:22 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
संयुक्त राष्ट्र को राहत पहुँचाने की अनुमति
राहत सामग्री
बर्मा में राहत सामग्री पहुँचना शुरू हो गई है
बर्मा के सैन्य शासन ने तूफ़ान प्रभावित लोगों की मदद के लिए संयुक्त राष्ट्र को राहत सामग्री लिए एक विमान को आने की अनुमति दी है.

इस विमान में करीब 25 टन राहत सामग्री है. बर्मा के पड़ोसी और सहयोगी देशों से भी राहत सामग्री आना शुरू हो गई है.

हालांकि ये आशंका अभी भी जताई जा रही है कि बाहरी देशों को बर्मा आने की अनुमति मिलने में हो रही देरी से राहत कार्यों में बाधा आ रही है.

शनिवार को बर्मा में आए तूफ़ान में 22 हज़ार से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं और 41054 लोग लापता हैं. करीब दस हज़ार लोग बेघर हो गए हैं. माना जा रहा है कि हताहतों की संख्या और बढ़ सकती है.

बीबीसी संवाददाता पॉल डानाहर का कहना है कि 1989 में लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनों के बाद से ये बर्मा के सैन्य शासकों के लिए ये सबसे बड़ी चुनौती है.

संयुक्त राष्ट्र आपदा राहत एजेंसी (ओसीएचए) के प्रवक्ता रिचर्ड हॉरसी के मुताबिक सरकार ने बर्मा के विदेश मंत्री को नियुक्त किया है कि वो राहत एजेंसियों के वीज़ा आवेदन पत्रों का कामकाज देखें.

संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम ने बर्मा के शहर रंगून में खाने-पीने की सामग्री बाँटनी शुरु कर दी है. भारत ने भी दो जहाज़ भेजे हैं.

चीन की सरकारी एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक चीन से 66 टन राहत सामग्री बर्मा पहुँच गई है.

'राहत सामग्री पर राजनीति न हो'

अमरीका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ ने भी राहत कार्यों के लिए पैसा देने की बात कही है लेकिन उनके लिए बर्मा में आना एक मुद्दा बना हुआ है.

बर्मा के सैन्य नेता पश्चिमी देशों से दूरी बनाकर चलते आए हैं लेकिन ऑस्ट्रेलिया और अमरीका समेत कई देशों ने बर्मा के नेताओं से अपील की है.

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री केविन रुड ने कहा, "राजनीति को भूल जाएँ. सिर्फ़ लोगों तक राहत पहुँचाने की ओर काम करें."

बर्मा में कई इलाक़े अभी भी कटे हुए हैं और सड़कों पर वृक्ष गिरे पड़े हैं और मलबा बिखरा हुआ है.

एक प्रत्यक्षदर्शी ने एएफ़पी को बताया, "लोगों के चेहरों पर जैसे कोई भाव नहीं बचा है. ज़िंदगी में उन लोगों ने ये स्थिति कभी नहीं देखी. लोगों ने परिवारवालों को खो दिया है, रहने के लिए घर नहीं है और खाना भी नहीं है."

यूनिसेफ़ का कहना है कि जो लोग बच गए हैं उनके पास पीने का पानी नहीं है और पनाह लेने के लिए जगह नहीं है.

बाढ़ के चलते मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियाँ फैलने की आशंका है जबकि गंदे पानी से हैजा और दस्त फैलने का डर जताया जा रहा है.

इस बीच माना जा रहा है कि शनिवार को बर्मा में प्रस्तावित संविधान पर होने वाला जनमतसंग्रह निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार होगा.

बर्मा में तूफ़ानबर्मा में तबाही का मंज़र
बर्मा में आए तूफ़ान के चश्मदीद बता रहे हैं कि तबाही का मंज़र कैसा था.
इससे जुड़ी ख़बरें
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>