|
संयुक्त राष्ट्र सहायता बर्मा पहुँची | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि सहायता सामग्री ले जाने वाला उसका हवाई जहाज़ बर्मा में पहुँच गया है जिसमें नरगिस तूफ़ान से प्रभावित लाखों लोगों के लिए आवश्यक चीज़ें पहुँचाई गई हैं. संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि सहायता सामग्री ले जाने वाले इस हवाई जहाज़ के बर्मा पहुँचने में देरी हुई क्योंकि बर्मा सरकार सहायता सामग्री स्वीकार करने में हिचक रही थी और इस वजह से अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी चिंतित था. संयुक्त राष्ट्र की सहायता सामग्री ले जाने वाला पहला विमान गुरूवार को इटली से बर्मा पहुँचा जिसमें ज़्यादा ऊर्जा देने वाले बिस्कुट, दवाइयाँ और अन्य ज़रूरी सामान भरा हुआ है. संयुक्त राष्ट्र की राहत सामग्री से भरे हुए तीन और विमानों के जल्दी ही बर्मा पहुँचने की संभावना है. संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी विश्व खाद्य कार्यक्रम का कहना है कि बर्मा के सैनिक सरकार के रवैये की वजह से भी सहायता कार्यक्रम वहाँ पहुँचाने में देरी हुई है क्योंकि बर्मा सरकार सहायता सामग्री लेने में हिचक रही थी. विश्व खाद्य कार्यक्रम के क्षेत्रीय निदेशक एंथॉनी बैनबरी का कहना था, "हमारे लिए ऐसा करना संभव नहीं था कि हम राहत सामग्री हवाई अड्डे पर लाते, उसे वहाँ उतारकर रख देते और वापस चले आते." संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि आपदा आकलन और समन्वय समिति के चार सदस्यों को बर्मा भेजने के लिए मंज़ूरी दे दी गई है लेकिन पाँचवाँ दल अब भी बर्मा का वीज़ा मिलने के इंतज़ार कर रहा है. बीमारियों का ख़तरा उधर अमरीका ने कहा है कि उसने बर्मा के लिए सहायता सामग्री भेजने की फिलहाल इजाज़त नहीं दी है. पहले ख़बरें आई थीं कि अमरीका ने बर्मा के लिए सहायता सामग्री रवाना कर दी है. बर्मा के सरकारी मीडिया का कहना है कि गत शनिवार को आए भीषण नरगिस नामक तूफ़ान में 22 हज़ार 980 लोग मारे गए हैं जबकि ऐसी आशंका जताई गई है कि इस तूफ़ान में मारे गए लोगों की संख्या एक लाख से भी ज़्यादा हो सकती है. बर्मा के दक्षिणी हिस्से में मौजूद बीबीसी संवाददाता पॉल डनहर का कहना है कि उन्होंने तूफ़ान से हुई भारी तबाही के निशान देखे हैं और बहुत से ऐसे लोग थे जो किसी भी तरह की पनाह की तलाश कर रहे थे. जो लोग जीवित बच गए हैं वे ऐसी भयावह स्थिति में रह रहे हैं कि आसपास शव पड़े हैं जिससे वातावरण का अंदाज़ा लगाया जा सकता है. इतना ही नहीं, जैसे-जैसे दिन गुज़र रहे हैं वैसे-वैसे बीमारियाँ फैलने का ख़तरा बढ़ रहा है. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इस तरह का कोई तूफ़ान या कोई अन्य प्राक़ति आपदा आने के बाद सड़कें बंद हो जाती हैं जिनसे सहायता प्रयासों में बाधा पहुँचती है लेकिन दक्षिणी बर्मा के इर्रावाड्डी डेल्टा इलाक़े में सड़कें ख़ाली पड़ी हैं. |
इससे जुड़ी ख़बरें 'तूफ़ान में एक लाख से ज़्यादा मारे गए'07 मई, 2008 | पहला पन्ना संयुक्त राष्ट्र को राहत पहुँचाने की अनुमति07 मई, 2008 | पहला पन्ना बर्मा की सहायता पर हो रही है राजनीति07 मई, 2008 | भारत और पड़ोस बर्मा में मृतक 22 हज़ार, हज़ारों लापता06 मई, 2008 | भारत और पड़ोस पीड़ितों के लिए भारत ने मदद भेजी06 मई, 2008 | भारत और पड़ोस समुद्री तूफ़ान की आशंका, बांग्लादेश सतर्क 02 मई, 2008 | भारत और पड़ोस इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||