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बर्मा में होगा तीन दिन का शोक | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बर्मा में तूफ़ान नर्गिस की चपेट में आकर मारे गए लोगों की याद में सैन्य शासन ने तीन दिन के शोक की घोषणा की है. ये जानकारी सरकारी टेलीवीज़न पर दी गई. इस दौरान बर्मा का राष्ट्रीय झंडा आधा झुका रहेगा. टेलीवीज़न पर जारी किए गए बयान में कहा गया है, "तूफ़ान नर्गिस में बहुत सारे लोग मारे गए हैं, इसलिए हमने तीन दिन के शोक की घोषणा की है- 20 मई से लेकर 22 मई तक." टीकाकारों का मानना है कि इस क़दम से लगता है कि शायद सैन्य शासन को अब ये समझ में आ रहा है कि ये कितनी बड़ी त्रासदी है और वो बाहरी मदद स्वीकार करने में ज़्यादा नरमी दिखा सकता है. बर्मा सरकार की इस बात के लिए कड़ी आलोचना हुई है कि उसने दो मई को आए भीषण तूफ़ान के बाद राहत कार्यों में तेज़ी नहीं दिखाई. तूफ़ान के कारण करीब 78 हज़ार लोगों की मौत हो चुकी है और 55 हज़ार लोग लापता हैं. इस बीच सोमवार को सिंगापुर में हुई आपात बैठक में बर्मा ज़्यादा अंतरराष्ट्रीय मदद स्वीकार करने पर सहमत हो गया है. हालांकि उसने दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों के संगठन ( आसियान ) को ये भी बता दिया है कि बर्मा चाहेगा कि मदद उसके क्षेत्रीय संगठनों के ज़रिए दी जाए न कि पश्चिमी एजेंसियों के ज़रिए. संवाददाताओं का कहना है कि ऐसा लगता है कि बर्मा के सैन्य शासन को ये बात समझ में आने लगी है कि अंतरराष्ट्रीय मदद की ज़रूरत है लेकिन वो पश्चिमी राहत एजेंसियों के कार्यकर्ताओं को देश में बड़े पैमाने पर प्रवेश देने से डरता है. उधर चीन में भूकंप के कारण मारे गए लोगों की याद में तीन दिनों का शोक शुरू हो गया है. एक सप्ताह पहले चीन के कई इलाक़ों में भूकंप आया था. | इससे जुड़ी ख़बरें तीन मिनट के मौन के साथ शोक शुरू19 मई, 2008 | पहला पन्ना चीन में राहत कार्यों में तेज़ी आई18 मई, 2008 | पहला पन्ना ब्रिटेन, फ़्रांस ने बर्मा की कड़ी आलोचना की17 मई, 2008 | पहला पन्ना बर्मा के पीड़ितों के लिए अमरीकी सहायता12 मई, 2008 | पहला पन्ना बर्मा में सरकार का रुख़ नरम हुआ11 मई, 2008 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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