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रविवार, 18 मई, 2008 को 02:23 GMT तक के समाचार
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चीन में राहत कार्यों में तेज़ी आई
बचाव कार्य में लगे लोग
लोग बेहद डरे हुए हैं. उनके चारों ओर ऐसी इमारते हैं जो कभी भी गिर सकती हैं
दक्षिण पश्चिमी चीन के भूकंप प्रभावित इलाक़ों में राहत और बाचव कार्यों में तेज़ी आई है जिससे स्थितियाँ बेहतर हुई हैं.

राष्ट्रपति हू चिंताओ ने अंतरराष्ट्रीय सहायता के लिए आभार जताया है. चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक हू चिंताओ ने 'विदेशी दोस्तों और सरकारों' को मदद पहुँचाने के लिए शुक्रिया अदा किया है.

अभी तक घरेलू और विदेशी मदद का आँकड़ा 80 अरब डॉलर के पार पहुँच चुका है.

दक्षिण-पश्चिमी चीन में लगभग 50 लाख लोग सोमवार को आए भूकंप के बाद बेघर हो चुके हैं लेकिन सहायता कार्यों में तेज़ी आने से स्थिति कुछ सुधरी है.

भूकंप के कारण बुनियादी सुविधाएँ चरमरा गई थी और अभी भी बेघर हुए लोगों तक ज़रूरी सामान पहुँचने में दिक्कतें आ रही हैं.

चीन की सरकार का कहन है कि भूकंप में 29 हज़ार लोगों की जानें गईं हैं लेकिन ये आँकड़ा 50 हज़ार से ज़्यादा होने की आशंका है.

अधिकारियों के मुताबिक लगातार बारिश होने के कारण राहत कार्यों में बाधा पहुँच सकती है.

दूर हुआ डर

चीन में आए भूकंप की वजह से ऐसा भय जताया जा रहा था कि बेचुआन में एक नदी अपना किनारा तोड़कर शहर में दाख़िल हो सकती है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

सोमवार को आए भूकंप की वजह से पूरा शहर बर्बाद हो गया है. बचाव कार्य जारी है औऱ लोगों को बचाने की कोशिशें हो रही हैं.

शनिवार को जारी बचाव अभियान में 31 साल की एक महिला को दयांग शहर से निकाला गया और खदान में काम करने वाले 33 साल के एक मज़दूर को शिफांग नाम की एक जगह से निकाला गया. दोनो ही लोग करीब 124 घंटों तक मलबे में दबे रहे.

बीबीसी संवाददाता का कहना है बाढ़ की चेतावनी के बाद बचाव कार्य स्थगित करना पड़ा था और हर जगह जैसे अफ़रा-तफ़री मच गई थी.

बचाव कार्य में लगे लोग
शुरूआत में चेतावनी आई थी कि भूस्खलन से एक झील बन गई है औऱ उसका किनारा टूट सकता है

उनका कहना था, "चाहे वो बचावकर्मी हों, सेना की बचाव टुकड़ियॉं, या फिर चिकित्साकर्मी, सभी लोगों ने वहॉं से भागना शुरू कर दिया. हम लोग एक व्यक्ति की तस्वीरें उतार रहे थे जो घंटों से मलबे में दबा हुआ था. तभी बाढ़ आने की संभावना की ख़बर आई और बचाव कार्य में जुटे लोगों को वहाँ से भागना पड़ा."

याद रहे कि चीन की सरकारी ज़िन्हुआ समाचार एजेंसी ने चेतावनी दी थी कि भूस्खलन की वजह से एक झील बन गई है और उसका किनारा कभी भी टूट सकता है. लेकिन बाद में चीन के अधिकारियों ने कहा कि शहर को कोई ख़तरा नहीं है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि उसने सेना को शहर में वापस आते हुए देखा है.

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