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लेबनान में संघर्षविराम पर सहमति नहीं | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इटली में लेबनान संकट पर हुई अंतरराष्ट्रीय बैठक में वहाँ स्थायी संघर्षविराम की ओर प्रयास करने का वादा किया गया है लेकिन तत्काल संघर्षविराम पर कोई सहमति नहीं बन पाई है. बैठक में इस विषय पर सहमति थी कि वहाँ संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में एक अंतरराष्ट्रीय फ़ौज तैनात करने की ज़रूरत है ताकि लेबनान की सरकार का प्रभुत्व कायम हो सके. लेकिन अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस का कहना था कि यदि स्थायी संघर्षविराम कायम करना है तो उसके लिए उपयुक्त परिस्थितियाँ होनी चाहिए. उधर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चार संयुक्त राष्ट्र पर्यवेक्षकों के इसराइली हमले में मारे जाने पर चर्चा चल रही है. मृतकों में एक अधिकारी चीन से था और चीन ने कहा है कि ये कार्रवाई माफ़ी के लायक नहीं है. लेकिन अमरीका का कहना है कि सुरक्षा परिषद को इसके लिए केवल अफ़सोस ज़ाहिर करना चाहिए क्योंकि कोई सबूत नहीं हैं कि पर्यवेक्षकों जानबूझकर निशाना बनाया गया. संयुक्त राष्ट्र की एक प्रारंभिक जाँच रिपोर्ट में कहा गया है कि शांति सैनिकों ने इसराइली हमले से पहले कम से कम दस बार इसराइली सैनिकों से संपर्क किया था. 'अरब देश निराश' इटली में अंतरराष्ट्रीय बैठक में अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने सीरिया और ईरान से हिंज़्बुल्ला को दी जा रही कथित मदद पर चिंता जताई. उधर संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान का कहना थी कि इन दोनो देशों को भी लेबनान पर होने वाले राजनीतिक समझौते में शामिल किया जाना चाहिए. सीरिया, ईरान और इसराइल को रोम में हुई बैठक में नहीं बुलाया गया. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि रोम बैठक के बाद जारी अंतिम बयान एक समझौता है जिसमें अमरीका के विचार तो व्यक्त हुए हैं लेकिन इससे संयुक्त राष्ट्र और अरब देशों को निराशा हुई है. लड़ाई जारी दूसरी ओर इसराइली सेना और हिज़्बुल्ला लड़ाकों के बीच दक्षिणी लेबनान में लड़ाई जारी है. रिपोर्टों में कहा गया है कि आठ से 13 के बीच इसराइली सैनिक मारे गए हैं लेकिन इसराइल ने इसकी पुष्टि नहीं की है. उधर राहत सामग्री लेकर संयुक्त राष्ट्र का एक काफ़िला बेरूत से दक्षिणी बंदरगाह टायर में पहुँच गया है. संयुक्त राष्ट्र अधिकारी यान एग्लैन ने बीबीसी को बताया कि इस काफ़िले में लगभग सौ टन राहत सामग्री है और संस्था लगभग दस हज़ार टन राहत सामग्री पहुँचाना चाहती है लेकिन इसके लिए लड़ाई बंद होनी चाहिए. |
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