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चेतावनियाँ नज़रअंदाज़ की गईं | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र की एक प्रारंभिक जाँच रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिणी लेबनान में शांति सैनिकों ने इसराइल के एक हवाई हमले में चार पर्यवेक्षक मारे जाने से पहले कम से कम दस बार इसराइली सैनिकों से संपर्क किया था. रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिणी लेबनान के ख़ियम गाँव में संयुक्त राष्ट्र की एक चौकी पर इसराइली विमानों ने अचूक निशाने वाली मिसाइल से हमला किया. संयुक्त राष्ट्र की इस प्रारंभिक जाँच से जुड़े कुछ राजनयिकों ने बताया है कि उससे पहले आसपास के इलाक़ों में छह घंटे तक गोलीबारी होती रही थी. रिपोर्ट में कहा गया है कि जब भी शांति सैनिकों ने इसराइली सेनाओं से संपर्क किया, हर बार उन्होंने यही कहा कि गोलीबारी रुक जाएगी. मध्य पूर्व के संकट पर रोम सम्मेलन में हो रही बातचीत के लिए यह ख़बर काफ़ी झटका देने वाली थी. रोम सम्मेलन में प्रतिनिधि इस बात पर सहमत हुए कि दोनों पक्षों के बीच युद्ध विराम यथाशीघ्र लागू कराने की ज़रूरत है. दुख और जाँच इसराइली प्रधानमंत्री एहूद ओलमर्ट ने लेबनान में ख़ियम में इसराइली हवाई हमले में संयुक्त राष्ट्र के चार सैन्य पर्यवेक्षकों के मारे जाने पर गहरा दुख व्यक्त किया है. एहूद ओलमर्ट ने कहा है कि दक्षिणी लेबनान में संयुक्त राष्ट्र के ये चार सैन्य पर्यवेक्षक ग़लती से मारे गए हैं. एहूद ओलमर्ट ने कहा है कि उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान को बताया है कि इस मामले की पूरी जाँच की जाएगी और जाँच रिपोर्ट को संयुक्त राष्ट्र को बताया जाएगा. लेकिन ओलमर्ट ने यह भी कहा कि वह यह नहीं समझ पाए हैं कि कोफ़ी अन्नान ने यह कैसे कह दिया कि यह हमला इसराइल की तरफ़ से जानबूझकर किया गया लगता है. कोफ़ी अन्नान ने इस बमबारी के तुरंत बाद एक वक्तव्य जारी करके व्यापक जाँच की मांग की थी और उन्होंने कहा था कि ख़ियम गाँव में जहाँ हमला हुआ वहाँ स्पष्ट तौर पर संयुक्त राष्ट्र की पोस्ट थी. कोफ़ी अन्नान ने कहा कि एहूद ओलमर्ट ने इससे पहले निजी तौर पर आश्वासन दिया था कि इसराइल हमलों में संयुक्त राष्ट्र के ठिकानों को निशाना नहीं बनाया जाएगा. '14 बार हमले' संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र की पोस्ट को इसराइली हमलें में निशाना बनाए जाने से पहले उस पर इसराइली सेना ने तोपों से 14 बार हमला किया था. यह भी कहा गया है कि वहाँ मौजूद संयुक्त राष्ट्र कमांडर ने बार-बार बताया था कि उस इलाक़े में संयुक्त राष्ट्र की चौकियाँ हैं. संयुक्त राष्ट्र का एक बचाव दल जब मलबे से सामान निकालने की कोशिश कर रहा था कि तब भी उस हमला किया गया. इसराइल के एक सैन्य प्रवक्ता ने कहा कि ख़ियम गांव में हिज़्बुल्ला के लड़ाके पनाह लिए हुए थे और इसराइली सेनाएँ हिज़्बुल्ला के ठिकानों को ही निशाना बना रहे थे.
संयुक्त राष्ट्र के जो सैन्य पर्यवेक्षक मारे गए हैं उनमें से एक चीन का नागरिक था और चीन के विदेश मंत्रालय ने इसराइली राजदूत को बुलाकर इस मुद्दे पर माफ़ी की मांग की. बाक़ी तीन पर्यवेक्षक फिनलैंड, ऑस्ट्रिया और कनाडा के थे. सहायता उधर संयुक्त राष्ट्र का एक राहत काफ़िला राजधानी बेरूत से दक्षिणी हिस्सों के लिए रवाना हुआ है जहाँ मानवीय सहायता की सख़्त ज़रूरत बताई जा रही है. दस ट्रकों के इस काफ़िले में लगभग 90 टन खाद्य सामग्री और चिकित्सा सामान ले जाया गया है और उम्मीद जताई गई है यटह लगभग पचास हज़ार लोगों के लिए तीन महीने तक काफ़ी होगा. यह काफ़िला दक्षिणी बंदरगाह शहर टायर की तरफ़ जा रहा है लेकिन इस पहाड़ियों के रास्ते से होकर जाना पड़ा रहा है क्योंकि इसराइली हमलों में मुख्य सड़कें और पुल ध्वस्त हो गए हैं. काफ़िले के साथ सफ़र कर रहे एक बीबीसी संवाददाता का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र ने इस राहत सामग्री को सुरक्षित मंज़िल पर पहुँचाने के लिए इसराइल और हिज़्बुल्ला दोनों से ही काफ़िले को सुरक्षित गुज़र जाने की अपील की है. इस बीच जॉर्डन का एक विमान हरक्यूलस-सी130 बेरूत पहुँचा है जिसमें 100 चिकित्सा कर्मी और आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित ऐसा अस्पताल है जो कहीं भी पूरी तरह काम कर सकता है. हवाई अड्डे के अधिकारियों ने कहा है कि इसराइली हमले शुरू होने के बाद से यह पहला अंतरराष्ट्रीय विमान है जो राहत सामग्री और चिकित्सा सुविधाओं के साथ लेबनान पहुँचा है. |
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