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संयुक्त राष्ट्र का सफ़र-I | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र के गठन से लेकर उसके आज के दौर तक सफ़र के कुछ महत्वपूर्ण पड़ाव. 1 जनवरी 1942: अमरीकी राष्ट्रपति फ़्रेंकलिन डी रूज़वेल्ट ने संयुक्त राष्ट्र के नाम का प्रस्ताव आगे बढ़ाया. इस शब्द का इस्तेमाल पहले भी किया गया था जब 26 देशों ने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान एकजुट होकर लड़ाई जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया था तब उन्होंने संयुक्त राष्ट्रों का घोषणा-पत्र जारी किया था. 26 जून 1945:50 देशों के प्रतिनिधि सैन फ्रांसिस्को में बैठक करते हैं जिसे संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन का नाम दिया गया. इसका मक़सद एक अंतरराष्ट्रीय संगठन का चार्टर तैयार करना था. पोलैंड उस सम्मेलन में शामिल नहीं था इसलिए उसने बाद में हस्ताक्षर किए और वह 51वाँ सदस्य बना. 24 अक्तूबर 1945:संयुक्त राष्ट्र औपचारिक रूप से इसी दिन वजूद में आया और इस दिन इसके चार्टर को चीन, फ्रांस, सोवियत संघ, ब्रिटेन, अमरीका और बाक़ी अन्य सदस्य देशों में मंज़ूरी दी. तब से हर साल 24 अक्तूबर को संयुक्त राष्ट्र दिवस मनाया जाता है. 10 जनवरी 1946:51 देशों का प्रतिनिधित्व करने वाली पहली महासभा की बैठक लंदन में वेस्टमिंस्टर के सेंट्रल हॉल में हुई. तत्कालीन ब्रितानी प्रधानमंत्री क्लेमेंट एटली ने उद्घाटन भाषण दिया. 17 जनवरी 1946: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की पहली बैठक लंदन में हुई जिसमें कार्यवाही के नियम अपनाए गए. 24 जनवरी 1946:संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अपना पहला प्रस्ताव पारित किया. इस पहले प्रस्ताव का उद्देश्य परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल पर ज़ोर देना और महाविनाश के अन्य हथियारों के उन्मूलन के लिए प्रयास करने पर ज़ोर देना था. 1 फ़रवरी 1946: नॉर्वे के ट्रिग्वे ली संयुक्त राष्ट्र के पहले महासचिव बने. जून 1948: फ़लस्तीन में पहला संयुक्त राष्ट्र निगरानी मिशन स्थापित किया गया. 24 अक्तूबर 1949:अमरीका के न्यूयॉर्क शहर में संयुक्त राष्ट्र के मुख्यालय की आधारशिला रखी गई जो आज भी उसका मुख्यालय है. 27 जून 1950:सुरक्षा परिषद ने एक प्रस्ताव पारित करके सभी देशों से कहा कि वे उत्तर कोरिया के दक्षिण कोरिया पर हमले के ख़िलाफ़ एकजुट हो जाएँ. यह प्रस्ताव इसलिए पारित हो सका क्योंकि उस वक़्त सोवियत संघ चीन को संयुक्त राष्ट्र में शामिल किए जाने की माँग को लेकर सुरक्षा परिषद का बहिष्कार कर रहा था अन्यथा सोवियत प्रतिनिधि इसे प्रस्ताव को वीटो कर देता.
जनवरी 1951: संयुक्त राष्ट्र की सेनाओं को चीन की सेनाओं के हाथों हार का सामना करना पड़ा जिसके बाद वे उत्तर कोरिया के उन हिस्सों से हट गईं जिन पर उन्होंने क़ब्ज़ा कर लिया था. राष्ट्रपति ट्रूमैन ने घोषणा की कि संयुक्त राष्ट्र युद्ध संधि करना चाहता है लेकिन जनरल मैकार्थर समझौते की शर्तों से संतुष्ट नहीं थे. वह चीन के साथ लंबा युद्ध चाहते थे और उन्होंने इस बारे में अपने विचार सार्वजनिक कर दिए. राष्ट्रपति ट्रूमैन ने जनरल मैकार्थर को 1951 में पद से हटा दिया. जुलाई 1953: दोनों कोरिया के बीच युद्ध विराम के लिए समझौता हुआ और एक सीमा रेखा निर्धारित की गई. उस समय कहा गया कि यह दस्तावेज़ युद्ध विराम के लिए अस्थाई समझौता है और स्थाई शांति क़ायम होने तक प्रभावी रहेगा. हालाँकि स्थाई शांति समझौता कभी नहीं हुआ और दोनों देश तकनीकी तौर पर युद्ध में ही रहे. 1954: संयुक्त राष्ट्र के शरणार्थी उच्चायुक्त को यूरोपीय शरणार्थियों के लिए काम करने पर नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया. 7 नवंबर 1956:मिस्र के स्वेज़ नहर संकट पर विचार करने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा का पहला आपात सत्र बुलाया गया और पहला संयुक्त राष्ट्र आपदा बल (यूएनईपी) बनाया गया. सितंबर 1960:17 नवस्वतंत्र देशों ने संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता हासिल की जिनमें से 16 देश अफ्रीका के थे. एक साल में यह सबसे ज़्यादा देशों ने संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता हासिल की थी. 12 अक्तूबर 1960:शीत युद्ध की चरम सीमा के दिनों में दोनों महाशक्तियाँ - अमरीका और सोवियत संघ - संयुक्त राष्ट्र में एक दूसरे के सामने आ गए. संयुक्त राष्ट्र महासभा में सोवियत नेता निकिता ख़्रुश्चेव ने ख़ुद पेश होकर फ़िलीपीन्स प्रतिधिनिमंडल के पश्चिमी उपनिवेशवाद के बारे में की गई टिप्पणी को आड़े हाथों लिया और अपना जूता मेज़ पर थपका था. 18 सितंबर 1961:दूसरे महासचिव डैग हैमर्सक्जोड की एक विमान हादसे में उस समय मौत हो गई जब वह कांगो एक मिशन पर जा रहे थे. उनके बाद यू थांट महासचिव बने.
अक्तूबर 1962:अमरीकी राष्ट्र जॉन एफ़ कैनेडी ने क्यूबा से सोवियत संघ के परमाणु मिसाइल हटाए जाने की माँग रखी. सात दिन तक दोनों महाशक्तियाँ इस मुद्दे पर अड़ी रहीं और यह गतिरोध क्यूबाई मिसाइल संकट के नाम से जाना जाता है. आख़िरकार सोवियत संघ के नेता निकिता ख़्रुश्चेव ने क़दम पीछे हटाए और दुनिया को परमाणु युद्ध के ख़तरे से बचाया जा सका. 1965: संयुक्त राष्ट्र बाल कोष - यूनीसेफ़ - को शांति नोबेल पुरस्कार दिया गया. 22 नवंबर 1967: इसराइल और अरब देशों के बीच छह दिन की लड़ाई के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रस्ताव संख्या 242 पारित करती है जिसका मक़सद मध्य पूर्व में शांति स्थापना था. 12 जून 1968: परमाणु अप्रसार संधि को संयुक्त राष्ट्र महासभा में मंज़ूरी दी गई और इसपर सभी देशों से हस्ताक्षर का आहवान किया गया. 1969: संयुक्त राष्ट्र के एक और अंग अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन को नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया. 25 अक्तूबर 1971:चीन के प्रतिनिधि को महासभा में बैठने की इजाज़त दी जाती है. 1972: कुर्त वाल्दहीम को संयुक्त राष्ट्र का चौथा महासचिव चुना जाता है. 13 नवंबर 1974: संयुक्त राष्ट्र महासभा ने फ़लस्तीनी मुक्ति संगठन (पीएलओ) को मान्यता दी और उसे पर्यवेक्षक का दर्जा दिया.
1980-1988: इराक़ और ईरान के बीच युद्ध आठ साल तक चला. संयुक्त राष्ट्र 1980 में ही युद्ध विराम का आहवान किया जिसे अनदेखा कर दिया गया. सुरक्षा परिषद ने 1988 में प्रस्ताव पारित किया लेकिन दोनों देश 1990 में ही युद्ध विराम पर राज़ी हो सके. 1981:संयुक्त राष्ट्र के शरणार्थी उच्चायुक्त को दूसरी बार नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस बार एशियाई शरणार्थियों की मदद के लिए. 1981: ज़ेवियर पेरेज़ डी क्यूलर को पाँचवाँ महासचिव बनाया गया. दिसंबर 1988: संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों को शांति का नोबेल पुरस्कार दिया गया. 1990:इराक़ पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए गए और बाद में इराक़ के ख़िलाफ़ बल प्रयोग की भी मंज़ूरी दी गई. 2 अगस्त 1990: इराक़ ने कुवैत पर हमला किया जिसके बाद खाड़ी युद्ध शुरू हो गया. संयुक्त राष्ट्र ने इराक़ को कुवैत से निकलने के लिए 15 फ़रवरी तक का समय दिया लेकिन इराक़ वहाँ से नहीं हटा तो 17 फ़रवरी को उस पर हमला कर दिया गया जिसे ऑपरेशन डेज़र्ट स्टॉर्म नाम दिया गया. 31 जनवरी 1992:न्यूयॉर्क में सुरक्षा परिषद की बैठक हुई जिसमें पहली बार सभी 15 सदस्यों ने हिस्सा लिया. जून 1992: रियो डी जनेरियो में पृथ्वी सम्मेलन हुआ जिसमें 100 देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. 1992:बुतरस बुतरस ग़ाली को छठा महासचिव बनाया गया. 1992:सोमालिया में संयुक्त राष्ट्र शांति सेना भेजी गई लेकिन वहाँ हालात इतने ख़राब थे कि शांति अभियान जारी नहीं रह सका और राजधानी मोगादीशू में 1995 में अपना दफ़्तर बंद करना पड़ा. अप्रैल 1994: दक्षिण अफ्रीका में संयुक्त राष्ट्र के पर्यवेक्षकों की देखरेख में चुनाव कराए गए. 25 मई 1994:24 साल के अंतराल के बाद दक्षिण अफ्रीका को संयुक्त राष्ट्र महासभा में स्थान मिला. 1995:संयुक्त राष्ट्र ने अपने वजूद के 50 साल पूरे करने पर समारोहों के साथ अपना जन्म साल मनाया. |
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