| संयुक्त राष्ट्र का सफ़र-II | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र ने 1995 में अपने वजूद के पचास साल पूरे किए और तभी से इसमें सुधारों की बात की जाने लगी. पचास साल पूरे करने के बाद के महत्वपूर्ण पड़ावों पर एक नज़र - 10 सितंबर 1996: महासभा व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि करती है. परमाणु निरस्त्रीकरण और परमाणु अप्रसार की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण पड़ाव था. यह संधि दस्तख़त के लिए 24 सितंबर से खुली. 17 दिसंबर 1996:घाना के राजनयिक कोफ़ी अन्नान को सातवाँ महासचिव चुना गया. 1997: जलवायु परिवर्तन पर क्योटो संधि हुई जिसमें औद्योगिक देशों पर क़ानूनी बाध्यता रखी गई कि वे ग्रीन हाउस समूह की गैसों के निस्तारण की मात्रा कम करने के लिए ठोस उपाय करेंगे. 1999:अमरीकी नेतृत्व वाले गठबंधन ने यूगोस्लाविया पर सुरक्षा परिषद की अनुमति के बिना आक्रमण किया जिससे संयुक्त राष्ट्र के अधिकार पर सवाल उठने लगे. रूस और चीन ने कह दिया था कि वे यूगोस्लाविया के ख़िलाफ़ किसी हमले के प्रस्ताव का समर्थन नहीं करेंगे जिसके बाद बिना अनुमति के ही उस पर हमला कर दिया गया. मार्च 2001:अमरीका क्योटो संधि से अपना हाथ खींच लेता है. चार महीने बाद 180 देश संधि की शर्तों पर राज़ी हो जाते हैं लेकिन अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा कि उनका देश कभी भी इस संधि पर हस्ताक्षर नहीं करेगा. 29 जून 2001:सुरक्षा परिषद की सिफ़ारिश पर महासभा ने कोफ़ी अन्नान को दूसरी बार महासचिव चुना और उनका दूसरा कार्यकाल दिसंबर 2006 तक चलेगा.
जुलाई 2001:अमरीका ने उस समझौते पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया जिसमें जैविक हथियारों के प्रयोग पर रोक लगाने का प्रावधान था. अमरीका ने कहा कि वह इसके मसौदे का इसलिए समर्थन नहीं कर सकता क्योंकि इससे अमरीकी हितों पर प्रतिकूल असर पड़ता है. मार्च, 2002:सुरक्षा परिषद ने पहली बार प्रस्ताव पारित किया जिसमें कहा गया कि इसराइल के साथ-साथ फ़लस्तीन नाम का भी एक देश रहेगा. यह मसौदा अमरीका ने तैयार किया जिमसें स्वतंत्र फ़लस्तीनी राष्ट्र की अवधारणा को 15 में से 14 सदस्यों का समर्थन मिला. सीरिया ने विरोध में मत नहीं दिया. जून 2002:संयुक्त राष्ट्र पर कोसोवो में अपना काम पूरा नहीं करने के आरोप लगे जिसकी वजह से क्षेत्र सर्ब अल्बानियन क्षेत्रों में बँट गया. सितंबर 2002:अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने महासभा में सभी देशों से कहा कि वे या तो "इराक़ के बढ़ते और गंभीर ख़तरे" का मुक़ाबला करें या फिर अगर अमरीका कार्रवाई करे तो उसके रास्ते से अलग हट जाएँ. 8 नवंबर 2002: कई सप्ताह की जद्दोजहद के बाद सुरक्षा परिषद प्रस्ताव संख्या 1441 पारित करती है जिसमें कहा गया कि अगर इराक़ महाविनाश के हथियारों को नष्ट नहीं करता या इस प्रस्ताव की शर्तें नहीं मानता तो उसे गंभीर नतीजे भुगतने के लिए तैयार रहना चाहिए. इराक़ ने इस प्रस्ताव की शर्तें स्वीकार कीं. 27 नवंबर 2002: संयुक्त राष्ट्र के हथियार निरीक्षकों ने डॉक्र हांस ब्लिक्स के नेतृत्व में चार साल में पहली बार इराक़ का दौरा किया.
24 फ़रवरी 2003:अमरीका, ब्रिटेन और स्पेन ने इराक़ मुद्दे पर सुरक्षा परिषद में एक नया प्रस्ताव पेश किया. इस मसौदे में प्रस्ताव संख्या 1441 में उस चेतावनी का ज़िक्र किया गया कि अगर इराक़ शर्तें नहीं मानता तो उसे गंभीर नतीजे भुगतने होंगे. नए प्रस्ताव में इराक़ पर आरोप लगाया गया है उसने प्रस्ताव संख्या 1441 के प्रावधानों को नहीं माना है. फ्रांस, जर्मनी और रूस ने एक अन्य प्रस्ताव पेश कर दिया जिसमें कहा गया कि सैन्य कार्रवाई के विकल्प के तौर पर इराक़ में हथियार निरीक्षण का काम तेज़र करना चाहिए. 7 मार्च 2003:मुख्य हथियार निरीक्षक हांस ब्लिक्स ने रिपोर्ट दी कि इराक़ ने अपना सहयोग बढ़ा दिया है लेकिन निरीक्षकों को अपना काम करने के लिए कुछ और समय चाहिए. 10 मार्च 2003:फ्रांस और रूस ने घोषणा की कि इराक़ पर नए प्रस्ताव को वे वीटो करने के लिए तैयार हैं. इस प्रस्ताव में इराक़ के निरस्त्रीकरण के लिए सात दिन का समय दिया गया था. इससे संयुक्त राष्ट्र में एक संकट की स्थिति बन गई. 20 मार्च 2003:इराक़ पर नया प्रस्ताव मतदान के लिए कभी पेश नहीं किया गया और इराक़ी राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को सत्ता से हटाने के लिए अमरीकी नेतृत्व में हमला शुरू हो गया. अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने देश को संबोधित किया और "इराक़ का निरस्त्रीकरण करने और इराक़ी लोगों को आज़ाद कराने" का आहवान किया. मई 2003: सुरक्षा परिषद ने एक प्रस्ताव पारित किया जिसमें इराक़ में अमरीकी प्रशासन को मान्यता दी गई और इराक़ पर से आर्थिक प्रतिबंध हटा लिए. इराक़ में अमरीकी प्रशासक ने बाथ पार्टी को ख़त्म कर दिया और सद्दाम हुसैन शासन की संस्थाओं को भी भंग कर दिया. 31 जुलाई 2003: महासचिव कोफ़ी अन्नान संयुक्त राष्ट्र इराक़ युद्ध के बाद अपने कामकाज के तरीक़े पर फिर से नज़र डालनी चाहिए. 19 अगस्त 2003:इराक़ में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय पर आत्मघाती हमला हुआ जिसमें अनेक लोग हताहत हुए. मारे गए लोगों में संयुक्त राष्ट्र के इराक़ में विशेष दूत सर्गियो विएरा डी मैलो भी थे. संयुक्त राष्ट्र ने कुछ समय के लिए इराक़ में अपना दफ़्तर बंद कर दिया. |
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