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बुधवार, 14 सितंबर, 2005 को 13:17 GMT तक के समाचार
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संयुक्त राष्ट्र सुधारः क्या हुआ, क्या नहीं
संयुक्त राष्ट्र
संयुक्त राष्ट्र की 60वीं सालगिरह पर हो रहा है सम्मेलन
इक्कीसवीं सदी की चुनौतियों का सामना करने के लिए संयुक्त राष्ट्र में किस तरह के सुधार किए जाएं इसको लेकर कई हफ़्तों की माथापच्ची के बाद जिस दस्तावेज़ पर सहमति हुई है वो अपने मूल स्वरूप का अंशमात्र रह गया है.

माना जा रहा है कि संयुक्त राष्ट्र में अमरीकी राजदूत जॉन बॉल्टन के सुझाये गए प्रस्तावों के कारण संयुक्त राष्ट्र, विकासशील देश और अमरीका के बीच कई असहमतियां पैदा हो गईं जिसके बाद महासभा के अध्यक्ष ने ज़्यादातर विवादास्पद मुद्दों को मसौदे से बाहर कर दिया.

आठ प्रमुख मुद्दों पर किसका रुख़ क्या रहा?

सुरक्षा परिषद में सुधार

संयुक्त राष्ट्र—महासचिव कोफ़ी अन्नान इस क्रांतिकारी बदलाव के हक़ में हैं.

अमरीका—इसके विरोध में है. सोचने के लिए और समय चाहता है.

विकासशील देश—आपस में भी किसी सहमति पर नहीं पहुंच पाए हैं.

परिणाम—सुधार के मसौदे में अब इसे शामिल नहीं किया गया है और इस पर बहस दिसंबर तक के लिए स्थगित कर दी गई है.

विकास

संयुक्त राष्ट्र—सहस्राब्दि विकास लक्ष्य को लागू करने के लिए दबाव डाल रहा है. इसके तहत 2015 तक ग़रीबी को आधा करने और प्रारंभिक शिक्षा सबको मुहैया करवाने की बात है. उसकी मांग है कि विकसित देश अपने सकल घरेलू उत्पाद का 0.7 प्रतिशत इस दिशा में लगाएं.

अमरीका—विकास लक्ष्य और 0.7 प्रतिशत योगदान की बात को मसौदे से पूरी तरह से हटाना चाहता है.

विकासशील देश—राहत और कर्ज़ माफ़ी की दिशा में और ज़्यादा योगदान चाहते हैं और साथ ही व्यापार को भी और निष्पक्ष बनाने की मांग करते हैं.

परिणाम—अमरीका या कहें तो जॉन बॉल्टन की हार. लेकिन साथ ही अमरीका ने 0.7 प्रतिशत के योगदान पर हस्ताक्षर नहीं किया.

आतंकवाद

संयुक्त राष्ट्र—आतंकवाद की भर्तस्ना के लिए आम सहमति की सिफ़ारिश करता है.
अमरीका—आतंकवाद की परिभाषा भी चाहता है.

विकासशील देश—आम राय से भर्तस्ना के हक़ में हैं लेकिन साथ में एक और अनुच्छेद जोड़ना चाहते हैं जिसमें विदेशी क़ब्ज़े के ख़िलाफ़ आत्मनिर्णय के लिए संघर्ष के अधिकार की बात रखी जाए. ये मुख्य रूप से फ़ल्स्तीनी समस्या को ध्यान में रखकर सुझाया गया.

परिणाम—अमरीका इस अनुच्छेद के ख़िलाफ़ है और इस पर बातचीत चलते रहने की उम्मीद है.

संयुक्त राष्ट्र प्रबंधन में सुधार

संयुक्त राष्ट्र—कोफ़ी अन्नान फ़ैसले करने में और लचीलापन चाहते हैं.

अमरीका—प्रबंधन में सुधारों की बहुत ज़रूरत है लेकिन जल्दबाज़ी में किसी निर्णय के हक़ में नहीं है.

विकासशील देश—संयुक्त राष्ट्र महासभा के अधिकार कोफ़ी अन्नान को हस्तांरित करने के ख़िलाफ़ हैं.

परिणाम—बहुत ही मामूली सुधारों पर सहमति बनी.

शांति बहाल करने के लिए आयोग

संयुक्त राष्ट्र---अन्नान चाहते हैं कि इसकी स्थापना युद्ध के बाद के पुनर्निर्माण के लिए किया जाए.

अमरीका—इसके हक़ में है.

विकासशील देश—सैद्धांतिक रूप से इसके पक्ष में हैं लेकिन इसकी कार्यप्रणाली पर कई मतभेद हैं.

परिणाम—सैद्धांतिक रूप से सहमति बन गई है लेकिन इसके विस्तृत पहलूओं को आगे के लिए टाल दिया गया है.

हथियार और अप्रसार

संयुक्त राष्ट्र—अन्नान छोटे हथियारों की ख़रीद फ़रोख्त पर क़ानूनी रूप से बाध्य करनेवाले एक अंतरराष्ट्रीय समझौते के हक़ में हैं. इस पर उन्हें ब्रिटेन का समर्थन मिल रहा है.

अमरीका—इसके विरोध में हैं.

विकासशील देश—मिली जुली राय.

परिणाम—अमरीका की जीत. सुधार के आरंभिक मसौदे में ये प्रस्ताव शामिल था लेकिन अब ये बिल्कुल ग़ायब है.

मानवाधिकार परिषद

संयुक्त राष्ट्र—इसके हक़ में है. इसके पहले की संस्था मानवाधिकार आयोग की बहुत बदनामी हुई क्योंकि ऐसे देश जहां मानवाधिकारों का खुलकर हनन हुआ है वो भी इसके अध्यक्ष बने.

अमरीका---इसके हक में है.

विकासशील देश—कुछ देश ज़्यादा निरीक्षण के ख़िलाफ़ हैं.

परिणाम—बहुत ही ढुलमुल. सिद्धांत पर सहमति लेकिन उससे आगे कोई सहमति नहीं.

नरसंहार

संयुक्त राष्ट्र—अन्नान चाहते हैं कि सदस्य देश किसी भी नरसंहार के ख़िलाफ़ जवाबी कार्रवाई में और ज़िम्मेदारी लें जो वर्तमान अंतरराष्ट्रीय क़ानून से ज़्यादा प्रभावशाली हो.

अमरीका—इसका समर्थन करता है.

विकासशील देश—कुछ देश संप्रभुता के हनन के ख़िलाफ़ हैं.

परिणाम—सहमति बन जाने के आसार.

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