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रविवार, 14 अगस्त, 2005 को 05:12 GMT तक के समाचार
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'जनसंहार पर प्रस्ताव का समर्थन करें देश'
रवांडा
रवांडा में जनसंहार नहीं रोक पाया था अंतरराष्ट्रीय समुदाय
अंतरराष्ट्रीय चैरिटी संस्था ऑक्सफ़ैम ने अमरीका, रूस, भारत और ब्राज़ील से अपील की है कि वे जनसंहार रोकने के लिए संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव का समर्थन करें.

ऑक्सफ़ैम का आरोप है कि ये चारों देश 1994 में रवांडा में हुए जनसंहार जैसी घटनाओं को रोकने के लिए संयुक्त राष्ट्र की योजना का विरोध कर रहे हैं.

ऑक्सफ़ैम के मुताबिक़ संयुक्त राष्ट्र के इस प्रस्ताव में इसका प्रावधान किया गया है कि अगर संबंधित सरकारें जनसंहार रोकने में विफल रहती हैं तो अंतरराष्ट्रीय समुदाय क़दम उठाएगा.

ऑक्सफ़ैम का यह बयान ऐसे समय आया है जब संयुक्त राष्ट्र सुधारों पर विचार-विमर्श के लिए अगले महीने संयुक्त राष्ट्र का सम्मेलन हो रहा है.

इस संस्था का कहना है कि अमरीका सार्वजनिक रूप से तो यह कह रहा है कि वह इस योजना का समर्थन करता है के लिए सैद्धांतिक रूप से वह इस पर पानी फेरने की कोशिश कर रहा है.

ऑक्सफ़ैम का कहना है कि इन चार देशों के अलावा भी कई देश इसका विरोध कर रहे हैं. इनमें शामिल हैं- सीरिया, ईरान, क्यूबा, पाकिस्तान, मिस्र और अल्जीरिया.

प्रस्ताव

इस प्रस्ताव के मसौदे में कहा गया है, "जनसंहार, युद्ध अपराध, जातीय संहार और मानवता के ख़िलाफ़ अपराधों से लोगों की रक्षा के लिए संयुक्त राष्ट्र समय पर निर्णायक तरीक़े से क़दम उठाएगा और यह संयुक्त राष्ट्र की ज़िम्मेदारी होगी."

प्रस्ताव के मौजूदा स्वरूप का पक्ष लेते हुए ऑक्सफ़ैम ने कहा है कि अगर संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देश चाहते हैं कि जनसंहार की घटनाएँ भविष्य में न हों, तो इसके लिए यह ज़रूरी है कि इस प्रस्ताव में ऐसे ही कड़े शब्दों का इस्तेमाल हो.

इस चैरिटी संस्था का कहना है कि ऐसे प्रस्ताव से नए मानदंड स्थापित होंगे और जब ज़रूरत पड़ी, अंतरराष्ट्रीय समुदाय क़दम भी उठा पाएगा.

न्यूयॉर्क में ऑक्सफ़ैम के प्रवक्ता निकोला रेनड्रॉप ने बताया कि संस्था ऐसी सरकारों को बेनक़ाब करेगी जो इस प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं ताकि इन देशों के ख़िलाफ़ जनमत बनाया जा सके और इन देशों का विचार बदला जा सके.

इस प्रस्ताव का समर्थन करने वाले देशों में शामिल हैं- दक्षिण अफ़्रीका, रवांडा, तंज़ानिया, नाइज़ीरिया, कीनिया, चिली, पेरू, अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड, जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापूर, कनाडा और यूरोपीय संघ के देश.

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