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अमरीका में सतर्कता बढ़ाई गई | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लंदन के धमाकों की गूंज हज़ारों मील दूर अमरीका में भी पहुँची है और वहाँ एक बार फिर ग्यारह सितंबर 2001 के हमलों की याद ताज़ा हो गई जिसके बाद पूरे देश में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने विदेशों में तमाम अमरीकी दूतावासों को अपनी सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने के आदेश दिए हैं. अमरीका में यातायात के साधनों की सुरक्षा के लिए सतर्कता का स्तर बढ़ा कर 'उच्च' कर दिया गया है. रेलगाड़ियों और बसों की सुरक्षा और बढ़ा दी गई है. हर रेलगाड़ी पर पुलिस के जवान सवार हैं और बड़े-बड़े शहरों में रेलगाड़ियों के स्टेशन और बस अड्डे ख़ासतौर पर छावनी जैसे लगने लगे हैं. लोगों में अब फिर दहशत है. न्यूयॉर्क जैसे शहरों तो अभूतपूर्व सुरक्षा देखने में आ रही है जहाँ भूमिगत रेल की सुरक्षा पर ख़ास ध्यान दिया जा रहा है. न्यूयॉर्क में क़रीब पचास लाख लोग रोज़ाना भूमिगत रेल में और बस के ज़रिए सफ़र करते हैं. स्टेशनों पर और रेलगाड़ियों के अंदर भी बंदूकों से लैस पुलिस जवान तैनात हैं, उनमें से कुछ खोजी कुत्ते लिए हुए हैं तो कुछ जाँच पड़ताल के लिए तरह-तरह के यंत्र लिए हुए. जगह-जगह बसों की तलाशी ली जा रही है. पुलिस के जवान यात्रियों को आत्मघाती हमलावरों से होशियार रहने के लिए संदिग्ध हमलावरों की संभावित वेषभूशा का भी वर्णन लोगों को बता रहे हैं. लेकिन कुछ लोग इसे काफ़ी नहीं मानते. अजीत कुमार भारतीय मूल के न्यूयॉर्क वासी हैं. वह कहते हैं कि सुरक्षा कर्मियों को और प्रशिक्षण की ज़रूरत है. “डर तो लगता है क्योंकि मैनहैटन में तो सुरक्षा काफ़ी है लेकिन दूर दराज़ के इलाक़ों में कोई भी स्टेशन से घुसकर सवार हो सकता है. इसके अलावा पुलिस वाले हमलावरों की पहचान करने में भी चूक कर सकते हैं. उन्हें और ट्रेनिंग दी जानी चाहिए.” अमरीका के आतंरिक सुरक्षा मंत्री माईक चर्टांफ़ ने घोषणा करते हुए कहा कि किसी आतंकवादी हमले की कोई सूचना नहीं मिली है लेकिन लंदन के हमलों के पेशेनज़र सावधानी बरती जा रही है. कड़ी सतर्कता न्यूयॉर्क के प्रतिष्ठित आर्थिक केंद्र वॉल स्ट्रीट और मशहूर इलाके टाईम्स चौक में भी सख़्त सुरक्षा है. इन इलाक़ों में लोगों की भीड़ भी बहुत होती है. पुलिस के जवान और सुरक्षा बल हर तरफ़ मुस्तैद दिख रहे हैं. सादे लिबास में भी सुरक्षाकर्मी, लोगों की भीड़ में मौजूद हैं.
न्यूयॉर्क शहर के मेयर माईकल ब्लूमबर्ग ने लोगों से चौकन्ना रहने और अपने आसपास किसी संदिग्ध व्यक्ति या चीज़ के बारे में फ़ौरन पुलिस को सूचना देने की अपील की है. लेकिन मेयर का लोगों से यह भी कहना है कि वह अपना काम काज आम दिनों की तरह ही करते रहें और बसों और रेलगाड़ियों में सफ़र करने में डरें नहीं. लेकिन आम लोगों में भय तो बाहरहाल है ही. अब भले ही मजबूरन काम के लिए घर से निकलकर बसों और रेलगाड़ियों में सफ़र क्यों न करना पड़े. 70 वर्षीय अविनाश शर्मा न्यूयॉर्क के मशहूर ग्रेंड सेंट्रल स्टेशन में एक दुकान पर काम करते हैं. वह कहते हैं, “डर तो लगता है लेकिन पेट के लिए काम तो करना ही पड़ता है. क्या करें, मजबूरी है. कोई भी इंसान बे मौत मरना पसंद नहीं करता है चाहे बूढ़ा हो या जवान.” लेकिन इसी तरह के स्टेशन पर एक परिवार से भी मुलाक़ात हुई जो न्यूयॉर्क में घूमने निकला था. उनका कहना था कि जो होना होगा होगा हम तो घूमेंगे. “हम तो घूमने के लिए आए हैं. हमारा तो पहले से ही इरादा था. हम लोगों को कोई डर भी नहीं लग रहा है. लंदन में जो हुआ सो हुआ, ज़रूरी नहीं की यहाँ भी हो जाए.” कुछ लोग आमतौर पर यही कहते नज़र आ रहे हैं कि अब तो उन्हें इन्हीं खतरों के बीच रहना है. |
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