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गुरुवार, 07 जुलाई, 2005 को 14:35 GMT तक के समाचार
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'आतंकवाद का निशाना विश्व अर्थव्यवस्था'
केपीएस गिल
भारतीय विशेषज्ञ मानते हैं कि आतंकवाद के ख़िलाफ़ सबको लड़ना होगा
आतंकवाद के ख़िलाफ भारत के विशेषज्ञ केपीएस गिल का कहना है कि मैं शुरू से कहता आया हूँ कि आतंकवाद का मुख्य उद्देश्य विश्व की अर्थव्यवस्था को तबाह करना है.

अमरीका पर हमले के बाद भी अर्थव्यवस्था धीमी पड़ गई थी और एयरलाइंस को भारी घाटा उठाना पड़ा था.

लंदन दुनिया का आर्थिक केंद्र माना जाता है इसलिए मेरा मानना है कि जो आर्थिक केंद्र हैं, उन्हें बचाना होगा.

दरअसल जहाँ लोकतंत्र होता है,वहाँ लोग ज्यादा प्रतिबंध पसंद नहीं करते हैं.

लाखों लोग अंडरग्राउंड से यात्रा करते हैं,सबकी जाँच करना बेहद कठिन काम है.

इतने बड़े नेटवर्क को बचाना आसान काम नहीं है.अब विस्फोटक एक क़िताब जैसे आकार में ले जाए जा सकते हैं.

मेरा अंदाज़ा है कि इन विस्फोटों के पीछे ज़्यादा लोग नहीं होंगे. इसके पीछे 10-12 लोग हो सकते हैं.

जब तक आतंकवाद ख़त्म नहीं होता तब तक दुनिया की अर्थव्यवस्था पर हमले होते रहेंगे.

मेरा मानना है कि आतंकवाद के साथ कोई समझौता नहीं हो सकता.

आप किसी चरमपंथी ग्रुप से बातचीत कर आतंकवाद को खत्म नहीं कर सकते.

पूरी दुनिया को मिलकर इनके ख़िलाफ़ कार्रवाई करनी होगी और ठोस क़दम उठाने होंगे ताकि इसे जड़ से ख़त्म किया जा सके.

एकबार में दुनिया में 400 से 500 चरमपंथी सक्रिय होते हैं, उन्हें ढूँढ निकालने में मदद करना हर व्यक्ति का कर्तव्य है.

(केपीएस गिल से बातचीत पर आधारित)

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